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जम्मू-कश्मीर में सदियों पुरानी ‘दरबार मूव’ परंपरा फिर बहाल। श्रीनगर के सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुरू किया कामकाज। जानें क्या है इस 150 साल पुरानी प्रथा का इतिहास।
श्रीनगर में खुला सिविल सचिवालय: ‘दरबार मूव’ परंपरा की वापसी
जम्मू-कश्मीर सरकार की मुख्य सत्ता का केंद्र, सिविल सचिवालय, सोमवार को श्रीनगर में फिर से खुल गया। सदियों पुरानी द्विवार्षिक “दरबार मूव” परंपरा के तहत प्रशासन ने ग्रीष्मकालीन राजधानी में कामकाज शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के श्रीनगर पहुंचने पर उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह कदम पुनर्जीवित दरबार मूव प्रणाली के तहत शासन की एक नई निरंतरता का प्रतीक है, जिसमें कई वर्षों के अंतराल के बाद पूरा सचिवालय श्रीनगर स्थानांतरित हुआ है।
ऐतिहासिक महत्व और प्रशासन का स्थानांतरण
‘दरबार मूव’ की यह अनूठी व्यवस्था साल में दो बार अपनाई जाती है, जिसके तहत प्रशासन सर्दियों के महीनों में जम्मू से और गर्मियों के मौसम में श्रीनगर से कार्य करता है। इस परंपरा की शुरुआत 1872 में महाराजा गुलाब सिंह द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों क्षेत्रों की चरम मौसम स्थितियों (श्रीनगर की कड़ाके की ठंड और जम्मू की झुलसाने वाली गर्मी) से बचना और जम्मू तथा कश्मीर संभागों के बीच संतुलित शासन सुनिश्चित करना था। स्वतंत्रता के बाद भी लोकतांत्रिक सरकारों ने जनसंपर्क बनाए रखने के लिए इस प्रथा को जारी रखा।
Restoration (पुनर्स्थापना): उमर अब्दुल्ला सरकार का बड़ा फैसला
प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल बदलावों का हवाला देते हुए उपराज्यपाल शासन के दौरान 2021 में इस प्रथा को बंद कर दिया गया था। हालांकि, 2025 में कार्यभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे फिर से बहाल करने का निर्णय लिया। सचिवालय का श्रीनगर में फिर से खुलना न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि इसे दोनों क्षेत्रों के बीच भावनात्मक और राजनीतिक जुड़ाव को मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह पहले जम्मू में कार्यालय बंद होने के बाद अब पूरी मशीनरी श्रीनगर से संचालित होगी।