चंडीगढ़ पुलिस ने ईमेल बम धमकियों से निपटने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक कर SOP पर चर्चा की। वहीं ED ने 26 ठिकानों पर कार्रवाई की।
चंडीगढ़ में हाल के दिनों में ईमेल के जरिए मिल रही बम धमकियों को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी सिलसिले में मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस ने विभिन्न विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय हितधारक बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता यूटी चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने की। इसमें एसएसपी ऑपरेशंस राजेश शर्मा और एसपी सिटी विजय कुमार के अलावा सरकारी और निजी स्कूलों, अस्पतालों, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज तथा इंजीनियरिंग विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पुलिस के मुताबिक, बैठक का मुख्य उद्देश्य ईमेल के जरिए आने वाली बम धमकियों से निपटने के लिए प्रभावी और समन्वित प्रतिक्रिया व्यवस्था तैयार करना था।
ईमेल बम धमकियों से निपटने के लिए SOP तैयार
चंडीगढ़ पुलिस की ओर से बताया गया कि बैठक में ईमेल आधारित बम धमकियों के मामले में विभिन्न विभागों की भूमिका, आपातकालीन प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय पर चर्चा की गई। पुलिस एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी Standard Operating Procedure (SOP) तैयार कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की धमकी मिलने पर संबंधित संस्थान और सुरक्षा एजेंसियां तय प्रक्रिया के अनुसार तेजी से कार्रवाई कर सकें। इसके लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों से सुझाव भी लिए गए।
स्कूल और अस्पताल भी बैठक में शामिल
बैठक में सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों तथा अस्पतालों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी खास तौर पर महत्वपूर्ण रही। ईमेल के जरिए मिलने वाली धमकियां अक्सर भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक संस्थानों को प्रभावित कर सकती हैं, ऐसे में पुलिस और संस्थानों के बीच बेहतर संचार व्यवस्था को जरूरी माना जा रहा है। फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेज और इंजीनियरिंग विभागों के प्रतिनिधियों को भी बैठक में शामिल किया गया, ताकि किसी संभावित आपात स्थिति में राहत, निकासी और तकनीकी सहायता से जुड़े पहलुओं पर पहले से समन्वय स्थापित किया जा सके। चंडीगढ़ पुलिस के आधिकारिक ढांचे में एसएसपी कंवरदीप कौर और एसएसपी ऑपरेशंस राजेश कुमार शर्मा प्रमुख पदों पर हैं।
आपात स्थिति में बेहतर समन्वय पर जोर
पुलिस की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के बीच प्रतिक्रिया समय को कम करना और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। किसी भी बम धमकी की सूचना मिलने पर पुलिस, फायर विभाग, संबंधित संस्थान और अन्य प्रशासनिक एजेंसियों के बीच तत्काल संपर्क आवश्यक होता है। SOP तैयार होने के बाद ऐसी परिस्थितियों में सूचना साझा करने, मौके पर पहुंचने, सुरक्षा घेरा बनाने और संबंधित संस्थान के साथ समन्वय जैसे मामलों के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध हो सकती है। इस तरह की तैयारी का उद्देश्य अफरा-तफरी कम करना और सुरक्षा प्रतिक्रिया को व्यवस्थित बनाना है।
दूसरी ओर ED की 26 ठिकानों पर कार्रवाई
इसी दिन चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में एक अलग मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई भी चर्चा में रही। ED ने तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में कुल 26 परिसरों पर सर्च और सर्वे ऑपरेशन किए। कार्रवाई के दायरे में दिल्ली, चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और लुधियाना स्थित परिसरों को शामिल किया गया। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत की गई।
किन कंपनियों और लोगों से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई?
अधिकारियों के अनुसार, ED की कार्रवाई तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों, निदेशकों और उनसे जुड़े लोगों के अलावा रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, MB इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े परिसरों तक फैली। जांच एजेंसी ने GMADA और पंजाब सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के कार्यालयों में भी सर्वे किया। इसका उद्देश्य संबंधित कंपनियों और प्राधिकरण के बीच हुए लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाना बताया गया है।
GMADA से जुड़े लेनदेन की भी जांच
ED की जांच में मोहाली में GMADA से जुड़े जमीन और संपत्ति लेनदेन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स और MB इंफ्राबिल्ड जैसी कंपनियों को भी नियंत्रित करते हैं। इन कंपनियों ने GMADA से मोहाली में दो प्रमुख नीलामी स्थलों का अधिग्रहण किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, बाद में प्राधिकरण को देय रकम के संबंध में इन कंपनियों को कथित तौर पर बड़ी वित्तीय राहत मिली। अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि कथित अनुचित लाभ और सरकारी खजाने को संभावित नुकसान की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
290 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले से भी जुड़ाव
तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स का नाम पहले से ही CBI और ED की जांच से जुड़े एक कथित बैंक फ्रॉड मामले में सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल परियोजना से संबंधित करीब 290 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड से जुड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में ED अब कंपनी और उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
कंसल्टेंसी फर्म भी जांच के दायरे में
ED ने Tila Consultants and Contractors Pvt Ltd के परिसरों की भी तलाशी ली है। यह कंपनी GMADA से जुड़े विभिन्न कंसल्टेंसी कार्य करती है। अधिकारियों को संदेह है कि यह फर्म संबंधित लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकती है। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसी की कार्रवाई के आधार पर सामने आने वाले दस्तावेजों तथा साक्ष्यों से मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
इस तरह चंडीगढ़ में मंगलवार का दिन सुरक्षा और जांच, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। एक ओर पुलिस ने ईमेल बम धमकियों से निपटने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के साथ समन्वित SOP तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की, वहीं दूसरी ओर ED ने तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई राज्यों में कार्रवाई की। दोनों मामलों में संबंधित एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्ष पर नजर बनी रहेगी।