भलस्वा लैंडफिल को लेकर AAP नेता प्रवीण ने रेखा गुप्ता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि साइट पर फिर करीब 20 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है।
दिल्ली के भलस्वा लैंडफिल साइट को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। AAP नेता प्रवीण ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों को हटाने और लैंडफिल साइटों की सफाई की बात कही गई है। प्रवीण ने आरोप लगाया कि भलस्वा में पुराने कचरे को हटाने के बाद वहां दोबारा बड़ी मात्रा में नया कचरा जमा हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भलस्वा लैंडफिल पर करीब 20 लाख मीट्रिक टन कचरे का नया पहाड़ खड़ा हो गया है। हालांकि, इस आंकड़े और लगाए गए आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रेखा गुप्ता के दावे पर AAP ने उठाए सवाल
AAP नेता प्रवीण ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विभिन्न जगहों पर दिल्ली से कूड़े के पहाड़ हटाने की बात कर रही हैं, लेकिन भलस्वा लैंडफिल की स्थिति को लेकर तस्वीर अलग है। उनके मुताबिक, भलस्वा में पहले जमा पुराने कचरे को हटाने का काम पिछली दिल्ली सरकार के दौरान शुरू हुआ था और अब बीजेपी सरकार के समय यहां दोबारा नया कचरा जमा हो रहा है। प्रवीण ने आरोप लगाया कि इससे लैंडफिल साइट पर कचरे का नया ढेर तैयार हो गया है। यह आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आया है और सरकार की ओर से इस विशेष आरोप पर प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
भलस्वा में पुराने कचरे की बड़ी मात्रा हटाई गई
रेखा गुप्ता जी जगह जगह कहती फिर रही हैं कि उन्होंने दिल्ली से कूड़े के पहाड़ खत्म कर दिए लेकिन असलियत इसके एकदम विपरीत है।
ये भलस्वा लैंडफिल साइट है, यहां केजरीवाल सरकार के समय कूड़े के पहाड़ को खत्म किया गया था। लेकिन भाजपा राज में आज यहां फिर से करीब 20 लाख मीट्रिक टन कूड़े का… pic.twitter.com/oYPGuPyRmH
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) September 22, 2026
भलस्वा लैंडफिल पर कचरा हटाने का काम कई वर्षों से चल रहा है। केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक भलस्वा साइट से 99.07 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट यानी वर्षों से जमा पुराने कचरे का निपटारा किया जा चुका था। मंत्रालय ने बताया था कि बाकी पुराने कचरे के पहाड़ को 15 अक्टूबर 2026 तक हटाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि मार्च 2026 तक जमा हुए कचरे को 31 दिसंबर 2026 तक साफ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
भलस्वा में अभी भी कचरा जमा होने की चुनौती
भलस्वा साइट पर सिर्फ पुराने कचरे को हटाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि रोजाना आने वाले नए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भलस्वा लैंडफिल पर करीब 4,000 टन नया कचरा प्रतिदिन पहुंच रहा था। मई 2026 की सरकारी समीक्षा में करीब 23.17 लाख मीट्रिक टन पुराना और नया कचरा साइट पर बाकी होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उस समय साइट के करीब 43 एकड़ हिस्से को साफ किया जा चुका था।
बीजेपी सरकार ने भी गिनाईं सफाई की उपलब्धियां
वहीं दिल्ली सरकार की ओर से लैंडफिल साइटों की सफाई को लेकर अलग-अलग आंकड़े जारी किए गए हैं। अगस्त के अंत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया था कि भलस्वा में करीब 102 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है और लगभग 45 एकड़ जमीन को रिक्लेम किया गया है। ओखला और गाजीपुर समेत तीनों प्रमुख लैंडफिल साइटों पर कुल मिलाकर 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किए जाने और करीब 100 एकड़ जमीन वापस हासिल करने का दावा किया गया था।
कचरा हटाने के लिए बायोमाइनिंग का इस्तेमाल
भलस्वा में पुराने कचरे को हटाने के लिए बायोमाइनिंग और कचरे की छंटाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें लैंडफिल में जमा पुराने कचरे को खोदकर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। उपयोगी सामग्री को अलग किया जाता है, जबकि मिट्टी जैसे निष्क्रिय पदार्थ और निर्माण से जुड़े मलबे को निर्धारित स्थानों पर इस्तेमाल किया जाता है। कुछ ज्वलनशील सामग्री को औद्योगिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार के अनुसार, भलस्वा में जुलाई 2022 से मिशन मोड में बायोमाइनिंग का काम चल रहा है।
नए कचरे के प्रबंधन पर भी जोर
भलस्वा में पुराने कचरे को हटाने के साथ-साथ नए कचरे की एंट्री और उसके निपटारे को नियंत्रित करना भी जरूरी है। केंद्र सरकार ने अगस्त में कहा था कि साइट पर आने वाले नए कचरे के प्रसंस्करण के लिए नए काम को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पुराने कचरे की सफाई के साथ नए कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी सुनिश्चित हो सके।
कूड़े के मुद्दे पर दिल्ली में राजनीतिक बहस तेज
भलस्वा, ओखला और गाजीपुर लैंडफिल लंबे समय से दिल्ली की राजनीति में प्रमुख मुद्दे रहे हैं। एक ओर दिल्ली सरकार पुराने कचरे की बड़ी मात्रा हटाने और जमीन रिक्लेम करने को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, वहीं AAP लगातार यह सवाल उठा रही है कि नए कचरे को रोकने और उसके प्रबंधन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। प्रवीण के ताजा बयान ने इसी राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। फिलहाल उपलब्ध सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भलस्वा में पुराने कचरे की बड़ी मात्रा हटाई गई है, जबकि साइट पर नए कचरे के प्रबंधन की चुनौती भी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले महीनों में लैंडफिल की सफाई और नए कचरे के निपटारे की प्रगति पर नजर रहेगी।