असम का ‘हरित संकल्प’: विश्व पर्यावरण दिवस पर 35 लाख महिला SHG सदस्यों के साथ होगा 1 करोड़ पौधों का महा-रोपण
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, असम सरकार ने आगामी 5 जून, यानी ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर राज्यव्यापी महा-वृक्षारोपण अभियान की तैयारी पूरी कर ली है। इस मेगा इवेंट का मुख्य उद्देश्य न केवल राज्य की हरित पट्टी को बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण संतुलन के प्रति जन-जागरूकता फैलाना भी है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें असम की 35 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य सक्रिय रूप से भाग लेंगी और कुल 1 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण
असम के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा ने इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूरदर्शी नेतृत्व में असम सरकार पर्यावरण और सतत विकास को लगातार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार का यह प्रयास केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर वनीकरण, वन सुधार की पहल, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और संरक्षण प्रयासों में आधुनिक तकनीक के एकीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
असम का यह ‘हरित अभियान’ राज्य को एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की ओर ले जाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 35 लाख महिला SHG सदस्यों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि यह एक जन-आंदोलन बनेगा, जिसमें ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण के संरक्षक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
गुवाहाटी में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
इस महा-अभियान की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए हाल ही में गुवाहाटी में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। बैठक में पर्यावरण एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। मंत्री अतुल बोरा ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के हर कोने में इस वृक्षारोपण अभियान को सुचारू और सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।
अतुल बोरा ने जोर देते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनकी उचित निगरानी और जीवित रहने की दर (Survival Rate) सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। सरकारी तंत्र को निर्देश दिया गया है कि वे सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ाएं और इस अभियान में स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।
लखपति बैदेऊ कार्यक्रम और अन्य पहल
इस बैठक के दौरान पर्यावरण अभियान के अलावा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की चल रही अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी चर्चा की गई। मंत्री अतुल बोरा ने विशेष रूप से ‘लखपति बैदेऊ’ (Lakhpati Baideo) कार्यक्रम की समीक्षा की। यह कार्यक्रम राज्य की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का यह तालमेल असम के सर्वांगीण विकास के लिए एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत करता है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. कल्याण चक्रवर्ती, आयुक्त कीर्ति जल्ली, असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ASRLM) की मिशन निदेशक कुंतलमणि शर्मा बोरदोलोई, एसआरएलएम के एसपीएम अनिंदिता डेका और नबजीत भारली, पर्यावरण एवं वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक हिरदेश मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
भविष्य की दिशा और पर्यावरण संतुलन
असम सरकार का यह कदम जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बीच एक आशा की किरण है। जिस तरह से मिशन मोड पर इस अभियान को संचालित किया जा रहा है, उससे उम्मीद है कि यह राज्य के वन क्षेत्र में न केवल बढ़ोतरी करेगा, बल्कि जैव विविधता को भी संरक्षित करेगा। वृक्षारोपण के साथ-साथ यह अभियान महिला सशक्तिकरण का भी एक बड़ा उदाहरण बन रहा है।
5 जून का यह दिन असम के लिए एक नई शुरुआत लेकर आएगा, जहाँ महिलाएं समाज में न केवल अपनी आर्थिक पहचान बना रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ‘स्वस्थ और हरा-भरा असम’ सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस 1 करोड़ पौधों की मुहिम को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर, इसे जनता के जुड़ाव और प्रकृति के प्रति प्रेम के रूप में स्थापित किया जाए।