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केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने एशियाई खेल 2026 के लिए ‘फन रन’ को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने केरल के योगदान को सराहा और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के भारत के लक्ष्य को साझा किया।
केरल की खेल जगत में भूमिका हमेशा से ही अग्रणी रही है। हाल ही में तिरुवनंतपुरम में ‘अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस’ के अवसर पर आयोजित ‘आइची-नागोया एशियाई खेल 2026 फन रन’ को हरी झंडी दिखाते हुए केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि 2026 के एशियाई खेलों में भारत की सफलता में केरल की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह आयोजन ‘ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया’ की ‘एशियन गेम्स फॉर ऑल’ पहल के तहत भारत में पहली बार आयोजित किया गया, जो भारतीय खेल इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
केरल: भारतीय खेल परिदृश्य का गौरव
मंत्री मंडाविया ने कहा कि भारत के खेल मानचित्र पर केरल का स्थान अद्वितीय है। यहाँ के लोगों का खेलों के प्रति जो उत्साह और जुनून है, वह केवल खिलाड़ियों के पदकों में ही नहीं, बल्कि आम जनता की भागीदारी में भी साफ झलकता है। उन्होंने पी.टी. उषा, अंजू बॉबी जॉर्ज और पी.आर. श्रीजेश जैसे महान एथलीटों को याद करते हुए कहा कि केरल ने निरंतर ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया है। मंडाविया के अनुसार, राज्य में खेलों का विकास पिछले एक दशक से सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा है।
खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकारी प्रयास
सरकार द्वारा खेल प्रतिभाओं को पोषित करने की दिशा में उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम के तहत केरल के 115 एथलीटों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है, जिनमें 69 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। इसके अलावा, राज्य के 17 खिलाड़ी ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) का हिस्सा हैं। यह योजना एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च प्रदर्शन करने के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं और सहायता प्रदान करती है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि यदि सही समय पर सही प्रोत्साहन दिया जाए, तो केरल के एथलीट भारत के लिए और भी अधिक स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।
भारत का भविष्य: ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों का लक्ष्य
भारत की दीर्घकालिक खेल दृष्टि के बारे में बात करते हुए मनसुख मंडाविया ने बड़ी घोषणाओं पर भी जोर दिया। भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की मेजबानी के अधिकार हासिल कर लिए हैं और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर, भारत का लक्ष्य 2036 तक दुनिया के शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल होना है। वहीं, 2047 तक, जब देश अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, भारत का लक्ष्य शीर्ष पांच खेल शक्तियों में जगह बनाना है।
गवर्नर और पी.टी. उषा का आह्वान
इस कार्यक्रम में उपस्थित केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि भविष्य में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के सपने को साकार करने के लिए भारत को अभी से खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश की बढ़ती खेल शक्ति का प्रमाण देगा और ओलंपिक मंच पर बड़ी उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे खेल की भावना को अपनाएं और राष्ट्र के गौरव के लिए निरंतर दौड़ते रहें।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने कहा कि खेल में उम्र, भाषा या पृष्ठभूमि से परे लोगों को एकजुट करने की अद्भुत शक्ति होती है। फन रन के दौरान उपस्थित जनसमूह और युवाओं के जोश को देखकर उन्होंने कहा कि यह दौड़ न केवल एक खेल आयोजन है, बल्कि यह संदेश देती है कि भारत आने वाले समय में खेल के क्षेत्र में महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है।
एक खेल संस्कृति का निर्माण
तिरुवनंतपुरम में आयोजित इस फन रन में मेयर, उप-मेयर, ओलंपिक खिलाड़ी पी.आर. श्रीजेश और जिला कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। यह विशाल जन-भागीदारी दर्शाती है कि केरल न केवल अपने खिलाडियों को सपोर्ट करता है, बल्कि खुद भी एक सक्रिय खेल संस्कृति को जीता है। सरकार की ये नीतियां और जमीनी स्तर पर बढ़ता खेलों के प्रति उत्साह निश्चित रूप से भारत को एक ‘स्पोर्टिंग नेशन’ के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा। ‘आइची-नागोया एशियाई खेल 2026’ इस दिशा में अगला बड़ा पड़ाव है, जहाँ से भारतीय खिलाड़ी एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ अपना लोहा मनवाने के लिए तैयार होंगे।