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मई 2026 में अपरा एकादशी 12 मई को और पद्मिनी एकादशी 28 मई को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए नोट करें इन दोनों व्रतों के शुभ मुहूर्त और पारण समय।
मई 2026 के महीने में हिंदू कैलेंडर के अनुसार दो अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी व्रत आने वाले हैं—अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी। शास्त्रों में इन दोनों ही व्रतों का विशेष महत्व बताया गया है। अपरा एकादशी जहां अपार पुण्य प्रदान करने वाली मानी जाती है, वहीं पद्मिनी एकादशी (जो अधिक मास में आती है) का फल कई यज्ञों के समान माना गया है।
1. अपरा एकादशी 2026 (वैशाख/ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष)
अपरा एकादशी का व्रत व्यक्ति को ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति दिलाता है और उसे अपार धन व प्रसिद्धि प्रदान करता है।
- तिथि: 12 मई 2026, मंगलवार।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026 को शाम 06:22 बजे से।
- एकादशी तिथि समापन: 12 मई 2026 को शाम 05:14 बजे तक।
- व्रत पारण का समय: 13 मई 2026 को सुबह 05:32 से 08:14 बजे के बीच।
2. पद्मिनी एकादशी 2026 (पुरुषोत्तम/अधिक मास शुक्ल पक्ष)
हिंदू पंचांग में जब अधिक मास (मलमास) आता है, तो उस महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत वैकुंठ धाम की प्राप्ति और मनचाही इच्छाओं की पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
- तिथि: 28 मई 2026, गुरुवार।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 मई 2026 को सुबह 09:12 बजे से।
- एकादशी तिथि समापन: 28 मई 2026 को सुबह 07:44 बजे तक।
- व्रत पारण का समय: 29 मई 2026 को सुबह 05:25 से 08:09 बजे के बीच।
एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में जागें: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें।
- संकल्प: भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- पूजन: भगवान श्री हरि विष्णु को पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ी जाती, इसलिए एक दिन पहले ही तोड़ लें।
- दीप-धूप: घी का दीपक जलाएं और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- सात्विकता: पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान का ध्यान करें। अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण (व्रत खोलें) करें।