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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी। जानें कश्मीर, CAA, UCC और बंगाल कानून-व्यवस्था पर उनके बड़े बयान।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। गृह मंत्री ने इस अवसर को एक “भावुक दिन” बताते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित था। पश्चिम बंगाल में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने घोषणा की कि बंगाल की धरती पर डॉ. मुखर्जी की याद में एक भव्य 125 फीट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखी गई है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके महान राष्ट्रवाद और बलिदान की याद दिलाती रहेगी।
अनुच्छेद 370 का उन्मूलन और कश्मीर का पूर्ण विलय
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण और वास्तविक एकीकरण के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनका नारा था कि ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करके डॉ. मुखर्जी के इसी ऐतिहासिक संकल्प को पूरा किया है। आज कश्मीर पूरी तरह से भारत का एक अभिन्न अंग बन चुका है और वहां विकास की एक नई सुबह आई है।
नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध और कैबिनेट से इस्तीफा
इतिहास के पन्नों को याद करते हुए अमित शाह ने बताया कि डॉ. मुखर्जी स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल के सदस्य थे, लेकिन उन्होंने वैचारिक मतभेदों के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने नेहरू-लियाकत समझौते को पूरी तरह से एकतरफा और असंतुलित पाया था। उनके अनुसार, इस समझौते में भारत में रहने वाले मुसलमानों की चिंताओं पर तो ध्यान दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की पूरी तरह से अनदेखी की गई थी। इसी ऐतिहासिक अन्याय के विरोध में उन्होंने कैबिनेट से त्यागपत्र देने का साहसिक निर्णय लिया था।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और शरणार्थियों को न्याय
केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की नागरिकता नीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने डॉ. मुखर्जी के सिद्धांतों पर चलते हुए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू किया है। इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों में धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदू शरणार्थियों को उनका सम्मान और नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने मंच से विश्वास दिलाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार होने के नाते, राज्य में रह रहे ऐसे सभी शरणार्थियों को नागरिकता देने की बची हुई औपचारिकताओं को बहुत जल्द और तेजी से पूरा किया जाएगा।
समान नागरिक संहिता (UCC) और कानून-व्यवस्था पर कड़े कदम
समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इसके लिए आवश्यक समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है और आने वाले समय में समान नागरिक संहिता को पश्चिम बंगाल में भी पूरी तरह से लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुधारने पर जोर देते हुए उन्होंने ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव संशोधन विधेयक, 2026’ के पारित होने की सराहना की। उन्होंने इसे अपराधियों और गुंडों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में पहला ठोस कदम बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य से अवैध घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्वदेशी नीतियों और भारतीयता की सुगंध का संकल्प
अपने भाषण के समापन में अमित शाह ने डॉ. मुखर्जी के वैचारिक दृष्टिकोण को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल सरकार बदलने में विश्वास नहीं रखते थे, बल्कि उनका मानना था कि स्वतंत्र भारत की नीतियां देश की अपनी मिट्टी की सुगंध से प्रेरित होनी चाहिए, न कि उन पर पश्चिमी देशों की कोई छाया हो। आज डॉ. मुखर्जी द्वारा स्थापित ‘जनसंघ’ ही ‘भाजपा’ के रूप में देश के दो-तिहाई हिस्से और आबादी पर शासन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज का भारत उसी स्वदेशी और आत्मनिर्भर मार्ग पर लगातार आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था।