राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकसित भारत के लिए समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को वर्ष 2026 के लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ऐसे समय में मिला है जब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीति और वैश्विक कूटनीति में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। हालांकि पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डोभाल ने अपनी उपलब्धियों या सुरक्षा अभियानों का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने पूरे भाषण का केंद्र भारत के भविष्य, युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण को बनाया। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी का मूल्यांकन इस आधार पर होता है कि वह अपने समय में मिले अवसरों का किस तरह उपयोग करती है। आज भारत के सामने एक ऐतिहासिक अवसर है और इसे सफल बनाने के लिए युवाओं को अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अजीत डोभाल ने कहा कि पुरस्कार केवल अतीत की उपलब्धियों का सम्मान नहीं होते, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियों की भी याद दिलाते हैं। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज एक ऐसे दौर में है, जहां वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय व्यक्तिगत सफलता से अधिक सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है। उनके इस संदेश को समारोह में मौजूद लोगों ने लंबे समय तक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।
अमित शाह ने की डोभाल के योगदान की सराहना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह में अजीत डोभाल को पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर शाह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की सुरक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा क्षमता और आतंकवाद से निपटने की रणनीति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि इस परिवर्तन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अजीत डोभाल की रणनीतिक सोच और नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में प्रधानमंत्री के साथ मिलकर डोभाल ने कई अहम फैसलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत की सुरक्षा नीति को दी नई दिशा
अजीत डोभाल के कार्यकाल में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक भारत को ऐसा देश माना जाता था जो आतंकवादी घटनाओं और सीमा पार से होने वाले हमलों पर केवल कूटनीतिक विरोध दर्ज कराता था। लेकिन पिछले वर्षों में भारत की रणनीति अधिक सटीक, निर्णायक और प्रभावी बनी है। वर्ष 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक और वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक को इसी नई सुरक्षा नीति का प्रतीक माना जाता है। इन अभियानों में सेना, खुफिया एजेंसियों, कूटनीति और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। इसके अलावा आतंकवाद की फंडिंग पर रोक, सीमा सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को भी मजबूत किया गया।
‘फिलॉसफर स्पाई’ के रूप में अलग पहचान
अजीत डोभाल को अक्सर ‘द फिलॉसफर स्पाई’ यानी दार्शनिक जासूस कहा जाता है। लंबे समय तक खुफिया एजेंसियों में काम करने के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर हमेशा व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत केवल उसकी सेना या हथियार नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की साझा चेतना, सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास होता है। उन्होंने कई बार कहा है कि भारत केवल एक भौगोलिक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत राष्ट्र (Civilisational State) है, जिसकी शक्ति उसकी संस्कृति, मूल्यों और एकता में निहित है। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा की शुरुआत नागरिकों के आत्मविश्वास और सामाजिक एकजुटता से होती है।
आधुनिक दौर में सूचना और विचारों की शक्ति सबसे बड़ी
डोभाल का मानना है कि आधुनिक समय में शक्ति की परिभाषा बदल चुकी है। आज केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना, तकनीक, साइबर क्षमता और जनमत से भी देशों की ताकत तय होती है। उन्होंने कहा है कि जो किसी समाज की सोच को प्रभावित कर सकता है, वही वास्तविक शक्ति रखता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर युद्ध और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के दौर में गलत सूचनाएं और झूठे नैरेटिव किसी भी देश के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। इसलिए उन्होंने नागरिकों के सही जानकारी प्राप्त करने और जागरूक रहने पर विशेष जोर दिया। उनका मानना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब नागरिक सही तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।
राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी
अजीत डोभाल ने अपने विचारों में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। उनके अनुसार एक मजबूत राष्ट्र के लिए सक्षम संस्थाएं, जागरूक नागरिक, आर्थिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकता समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उसके लोगों की इच्छाशक्ति और सामूहिक संकल्प में होती है। यही कारण है कि उन्होंने लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार स्वीकार करते हुए भी अपने व्यक्तिगत योगदान के बजाय देश के भविष्य और युवाओं की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। उनका संदेश स्पष्ट था कि यदि भारत को विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनना है तो प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। इसी सोच ने अजीत डोभाल को केवल एक सफल सुरक्षा विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीतिक विचारक के रूप में भी स्थापित किया है।