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पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए एयर इंडिया ने दिल्ली-तेल अवीव (इज़राइल) उड़ानों का निलंबन सितंबर के अंत तक बढ़ा दिया है। इस फैसले से इज़राइल में रह रहे 40,000 से अधिक भारतीयों की चिंता बढ़ गई है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अचानक बढ़े नए सैन्य संघर्ष, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं के बीच भारत की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने एक बड़ा फैसला लिया है। एयर इंडिया ने बुधवार को घोषणा की कि वह दिल्ली और तेल अवीव (इज़राइल) के बीच अपनी सभी उड़ानों का निलंबन (suspension) अब सितंबर के अंत तक बढ़ा रही है।
क्षेत्र में लगातार बनी हुई अस्थिर सुरक्षा स्थिति के कारण एयर इंडिया पिछले कई महीनों से इस मार्ग पर अपनी उड़ानों को बार-बार स्थगित करती आ रही है। एयर इंडिया का यह ताजा फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले 10 दिनों में अमरीका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां और हमले अभूतपूर्व रूप से तेज हो गए हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच गहराता सैन्य संघर्ष और सुरक्षा संकट
पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति बीते कुछ हफ्तों में तेजी से बिगड़ी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के भीतर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों—जैसे पुलों, जल विलवणीकरण संयंत्रों (water desalination plants) और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले किए गए हैं। इसके जवाब में तेहरान (ईरान) ने भी पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
सैन्य गतिविधियों में आई इस अचानक तेजी ने पूरे क्षेत्र के हवाई क्षेत्र (airspace) को अत्यधिक असुरक्षित बना दिया है। इजराइल में एयर इंडिया के परिचालन के प्रमुख एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हवाई क्षेत्र की सुरक्षा समीक्षा और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उड़ानों का निलंबन “सितंबर के अंत तक” बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर और ‘वेट एंड वॉच’ की नीति
पश्चिम एशिया में जारी इस भारी गोलाबारी और सैन्य टकराव के कारण केवल एयर इंडिया ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस भी ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की नीति अपना रही हैं।
फिलहाल इज़राइल के लिए बहुत सीमित उड़ानें ही संचालित हो रही हैं:
- इजराइली एयरलाइंस: अल अल (El Al), इस्रएयर (IsraAir), अर्किया (Arkia) और एयर हाइफा जैसी इजराइली विमानन कंपनियां सीमित स्तर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
- अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस: बहुत कम विदेशी एयरलाइंस ही इस जोखिम भरे हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने का साहस जुटा पा रही हैं।
उड़ानों के इस व्यापक निलंबन के कारण उन यात्रियों के सामने भारी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जो काम, छुट्टियों या अपने परिवारों से मिलने के लिए विदेश यात्रा करने की योजना बना रहे थे।
फरवरी से लगातार बढ़ रहा उड़ानों का निलंबन
फरवरी के अंत में जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष की शुरुआत हुई, उसके कुछ ही हफ्तों बाद भारतीय राष्ट्रीय वाहक (Air India) ने सतर्कता बरतते हुए अप्रैल में अपनी उड़ानों को मई के अंत तक के लिए स्थगित कर दिया था। इसके बाद स्थिति में सुधार न होने पर निलंबन को जुलाई के अंत तक बढ़ाया गया और अब वर्तमान भू-राजनीतिक संकट को देखते हुए इसे सितंबर के अंत तक बढ़ा दिया गया है।
हवाई सेवा के अचानक और लगातार बाधित होने से भारत और इजराइल के बीच सीधा हवाई संपर्क पूरी तरह से ठप पड़ गया है।
इज़राइल में रहने वाले 40,000 से अधिक भारतीयों की बढ़ीं मुश्किलें
एयर इंडिया द्वारा उड़ानों के निलंबन को आगे बढ़ाए जाने से इज़राइल में रहने और काम करने वाले 40,000 से अधिक भारतीयों के बीच भारी चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
- व्यक्तिगत व पेशेवर कारण: इनमें से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अपने व्यक्तिगत या पेशेवर काम से भारत लौटना चाहते हैं।
- सुरक्षा और अनिश्चितता: युद्ध के बढ़ते खतरे और क्षेत्र में छाये अनिश्चितता के बादलों के बीच कई भारतीय अपने वतन लौटकर सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं।
सीधी और सीधी उड़ानों के उपलब्ध न होने के कारण अब भारतीयों को अन्य देशों के माध्यम से लंबे और अत्यधिक महंगे कनेक्टिंग रूट्स का सहारा लेना पड़ रहा है। एयर इंडिया का यह फैसला यात्रियों और चालक दल (crew) की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद आवश्यक माना जा रहा है, लेकिन इसने पश्चिम एशिया में फंसे हजारों यात्रियों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है।