आम आदमी पार्टी के विधायक प्रवीण कुमार ने एमसीडी के टोल टैक्स टेंडर में नियमों को बदलकर 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। यह मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच चुका है।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के टोल टैक्स और पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) संग्रह के नए टेंडर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और जंगपुरा से विधायक प्रवीण कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर इस टेंडर प्रक्रिया के बहाने दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने और अपने चहेतों को फायदा पहुँचाने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है. ‘आप’ ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर #MCD500CrLoss अभियान शुरू कर इस कथित घोटाले को लेकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
नियमों में बदलाव कर चहेतों को पहुंचाया फायदा: प्रवीण कुमार
विधायक प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने टोल टैक्स के टेंडर में जानबूझकर ऐसी ‘शर्तें’ और ‘नियम’ जोड़े, जिससे प्रतिस्पर्धी कंपनियां बाहर हो जाएं और कुछ चुनिंदा फर्मों को ही इसका सीधा फायदा मिले. उनका कहना है कि एमसीडी द्वारा लाए गए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम के लिए जो नियम तय किए गए, वे बेहद सीमित और कुछ कंपनियों को लाभ पहुँचाने वाले थे.
टेंडर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि योग्य और ऊंची वित्तीय बोली (Financial Bid) लगाने वाली कंपनियों को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया. आम आदमी पार्टी का दावा है कि नियमों में इस हेरफेर के कारण दिल्ली नगर निगम के राजस्व और यहाँ की जनता को सीधे तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
ऊंची बोली लगाने वाली कंपनियों को टेंडर से किया बाहर
दिल्ली में 500 करोड़ का घोटाला बीजेपी सरकार ने एमसीडी में रचा
टोल कलेक्शन के टेंडर में किया महा घोटाला बीजेपी सरकार ने एक साल में दिल्ली के लोगो को लूट लिया अपने लोगो को फायदा पहुचाने के लिए बदले नियम !
@AamAadmiParty #MCD500CrLoss pic.twitter.com/siPeyx2nIe— Praveen Kumar 🇮🇳 (@Aap_Praveen) July 19, 2026
इस टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं के अनुसार, दो प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने दिल्ली सरकार और सतर्कता विभाग के सामने इस मामले को उठाया है. कंपनियों का दावा है कि उन्होंने एमसीडी को 1,057 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी वित्तीय बोली दी थी, जिससे निगम को भारी मुनाफा होता. लेकिन निगम ने नियमों का हवाला देते हुए केवल तीन चुनिंदा कंपनियों को ही योग्य माना, जिनमें से सबसे बड़ी बोली महज 964 करोड़ रुपये के आसपास है.
आप नेता प्रवीण कुमार ने इसी अंतर को उजागर करते हुए कहा कि जब 1,000 करोड़ से ऊपर की बोलियां मौजूद थीं, तो कम राशि वाली बोली को स्वीकार करना साफ तौर पर यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपये का खेल खेला गया है, जो पूरी तरह से जनता के पैसे की खुली लूट है.
मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित; विजिलेंस जांच की मांग
यह पूरा विवाद अब दिल्ली उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुँच चुका है, जहाँ टेंडर की शर्तों की वैधता को चुनौती दी गई है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. आम आदमी पार्टी और पीड़ित कंपनियों ने इस पूरे टेंडर घोटाले की स्वतंत्र केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग से जांच कराने की मांग की है. प्रवीण कुमार ने चेतावनी दी है कि वे जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा तक अपनी आवाज बुलंद रखेंगे और जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका यह विरोध थमेगा नहीं.