Table of Contents
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ईरान के मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की। चर्चा में पश्चिम एशिया की सुरक्षा, सऊदी अरब पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा उठने की संभावना है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा भारत और ईरान के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बातचीत की जानकारी दी। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस वार्ता को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में सऊदी अरब पर हुए हालिया हमलों और समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठे। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर भारत की चिंताएं महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन घटनाओं से भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है। ऐसे समय में डोभाल और रेजाई के बीच हुई बातचीत को पश्चिम एशिया के मौजूदा सुरक्षा संकट के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
भारत में ईरानी दूतावास के मुताबिक, अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई ने फोन पर बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हालांकि, बातचीत का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में हाल में बढ़े तनाव और सऊदी अरब पर हुए हमलों का मुद्दा भी चर्चा में शामिल रहा। भारत ने सऊदी अरब में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। भारत का कहना है कि नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। क्षेत्र में लगातार बदलते हालात के बीच भारत सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने की अपील करता रहा है। ऐसे में ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के साथ एनएसए की बातचीत को क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार-विमर्श के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सऊदी अरब पर हमलों को लेकर भारत की चिंता
पश्चिम एशिया में सुरक्षा संकट के बीच सऊदी अरब पर हुए हमलों ने भी क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत का भी उल्लेख किया गया है। भारत ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए इन्हें रोकने की मांग की थी। भारत की चिंता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों, वहां काम करने वाले श्रमिकों और समुद्री मार्गों पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी इसमें शामिल है। पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों की मौजूदगी के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए वहां बढ़ने वाला कोई भी सैन्य तनाव भारत के आर्थिक और सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों से बढ़ी चिंता
भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में जहाजों पर होने वाले हमलों से तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, समुद्र में काम कर रहे नाविकों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित और निर्बाध बने रहने चाहिए। जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ने से माल ढुलाई की लागत, बीमा खर्च और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं। माना जा रहा है कि डोभाल और रेजाई के बीच बातचीत में समुद्री सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर भी विचार किया गया होगा। हालांकि, इस विषय पर दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के विस्तृत ब्योरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
MT पेट्रो डॉल्फिन पर हमले के बाद दो भारतीय नाविक लापता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में MT पेट्रो डॉल्फिन नाम के एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ था। इस जहाज पर 11 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद इनमें से दो भारतीय नाविक लापता बताए गए। इस घटना ने समुद्री मार्गों पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किसी भी वाणिज्यिक जहाज पर हमला होने से न केवल जहाज और उसके माल को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, बल्कि चालक दल के सदस्यों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। ऐसी घटनाओं के बाद लापता नाविकों का पता लगाने, चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रभावित जहाजों की स्थिति का आकलन करने जैसे कदम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। भारत के लिए इस तरह की घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
MT वाल्थेरा पर भी हुआ हमला, सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
MT पेट्रो डॉल्फिन के अलावा MT वाल्थेरा नाम के एक अन्य जहाज पर भी हमला होने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि जहाज किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आ गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस जहाज पर सवार सभी 11 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। दोनों घटनाएं इस बात की ओर ध्यान दिलाती हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। भारत की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही बनाए रखना है। जहाजों पर हमलों से व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने के साथ ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है भारत
भारत पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए लगातार संवाद और कूटनीति पर जोर देता रहा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ईरान सहित सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखना महत्वपूर्ण है। अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई के बीच हुई बातचीत भी क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का हिस्सा है। हालांकि, बातचीत में किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और क्या कोई विशेष सहमति बनी, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल भारत की प्रमुख चिंताओं में पश्चिम एशिया में स्थिरता, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता शामिल हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और समुद्री मार्गों पर होने वाली घटनाएं भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती हैं।