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‘वोट चोरी’ के आरोपों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करते हुए विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेताओं ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर यह कदम उठाया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। विपक्षी नेता उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने इस मामले में मुलाकात से इनकार कर दिया। इसके बावजूद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली-लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया है। इस मार्च में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ इंडिया गठबंधन के घटक दलों, सामाजिक संगठनों और युवाओं के शामिल होने की संभावना है।
CJI सूर्यकांत से मुलाकात की मांग, क्यों नहीं मिली मंजूरी?
कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पत्र लिखकर सोमवार शाम चार बजे से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखना और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपना था। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे में इन मामलों पर न्यायालय में चल रही प्रक्रिया के मद्देनजर अलग से मुलाकात करना उचित नहीं है। CJI के इनकार के बाद विपक्षी नेताओं ने अपना कार्यक्रम रद्द नहीं किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का निर्णय बरकरार रखा। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना जरूरी है। वहीं, न्यायपालिका के समक्ष विचाराधीन मामलों पर कोई भी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही तय होगा।
‘चलो दिल्ली-लोकतंत्र के लिए मार्च’ में जुटेंगे विपक्षी नेता
कांग्रेस ने सोमवार के प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली-लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया है। पार्टी के अनुसार, प्रदर्शनकारी दोपहर डेढ़ बजे कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड के चौराहे पर एकत्र होंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा के शामिल होने की संभावना है। इनके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं के भी मार्च में हिस्सा लेने की उम्मीद है। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और युवाओं को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा गया है। विपक्षी दल इस प्रदर्शन के जरिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहते हैं। हालांकि, मार्च में शामिल होने वाले सभी नेताओं की अंतिम उपस्थिति और प्रदर्शन से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
राहुल गांधी ने रविवार को किया था मार्च का ऐलान
राहुल गांधी ने रविवार को घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के नेता, नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि और युवा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। उन्होंने कहा था कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य कथित ‘वोट चोरी’ पर रोक लगाने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को रोकने की मांग करना है। राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में होना और चुनावी प्रक्रिया का पारदर्शी रहना बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जांच की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग
विपक्षी दलों के इस आंदोलन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा भी प्रमुख है। SIR चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अद्यतन करने की प्रक्रिया है। विपक्षी नेता इस प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहे हैं और इसके प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन का अहम हिस्सा है। विपक्ष का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, इन आरोपों और मांगों पर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं, तथ्यों और न्यायिक विचार के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
राजनीतिक टकराव के बीच बढ़ी हलचल
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगने और फिर मुलाकात से इनकार के बावजूद मार्च जारी रखने के फैसले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष इस प्रदर्शन को लोकतंत्र, चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन मामलों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी महत्वपूर्ण है। सोमवार को होने वाले मार्च पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी। प्रदर्शन में इंडिया गठबंधन के नेताओं, सामाजिक संगठनों और युवाओं की भागीदारी से विपक्ष अपनी मांगों को व्यापक समर्थन दिलाने की कोशिश करेगा। फिलहाल, विपक्ष की प्रमुख मांगों में कथित वोट चोरी पर रोक, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को रोकना शामिल है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस आंदोलन का चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक विमर्श पर क्या प्रभाव पड़ता है।