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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अकी आबे से मुलाकात कर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को याद किया। वाराणसी में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन भारत-जापान मैत्री को समर्पित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दिवंगत जापानी नेता को दूरदर्शी व्यक्तित्व बताते हुए भारत और जापान के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने अकी आबे के भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव की सराहना की और कहा कि शिंजो आबे उनके प्रिय मित्र थे। पीएम मोदी के मुताबिक, शिंजो आबे ने भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने और दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अकी आबे से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने शिंजो आबे को एक ऐसा दूरदर्शी नेता बताया, जिनके प्रयासों ने भारत और जापान के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वाराणसी में शिंजो आबे की स्मृति और भारत-जापान मैत्री में उनके योगदान को समर्पित एक विशेष स्मारक गलियारे का उद्घाटन किया गया है। इस स्मारक के जरिए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और शिंजो आबे तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत मित्रता को सम्मान दिया गया है।
वाराणसी में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन
प्रधानमंत्री मोदी और अकी आबे की मुलाकात से एक दिन पहले बुधवार को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया। यह विशेष गलियारा जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारत-जापान संबंधों के विकास में उनके योगदान को याद करना और दोनों देशों की मित्रता को सम्मान देना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अकी आबे ने संयुक्त रूप से इस स्मारक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को स्मृति चिह्न भी भेंट किया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस स्मारक को शिंजो आबे की विरासत और भारत-जापान संबंधों में उनके स्थायी योगदान को समर्पित बताया। मंत्रालय के अनुसार, यह गलियारा भारत और जापान की साझेदारी के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित करता है। इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच समय के साथ मजबूत हुए राजनयिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को समझने का अवसर मिलता है। यह स्मारक भारत और जापान के बीच आपसी विश्वास तथा सहयोग की भावना को भी दर्शाता है।
पति की स्मृति में बने स्मारक को देखकर भावुक हुईं अकी आबे
शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान अकी आबे ने अपने दिवंगत पति को समर्पित इस स्मारक के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इस स्मारक और अपने पति के नाम पर इसका नाम रखे जाने से बेहद भावुक हैं। अकी आबे ने उन सभी लोगों के प्रति धन्यवाद जताया, जिन्होंने इस स्मारक को साकार करने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इस स्थान को देखकर उन्हें अपने पति की वाराणसी यात्रा की यादें ताजा हो गईं। उनका यह बयान इस बात को भी दर्शाता है कि शिंजो आबे का भारत के साथ संबंध केवल राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें व्यक्तिगत लगाव भी शामिल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मित्रता भारत-जापान संबंधों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही। वाराणसी में बने इस स्मारक के जरिए शिंजो आबे के भारत के प्रति जुड़ाव और दोनों देशों के बीच मित्रता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
फोटो गैलरी में दर्ज हैं भारत-जापान संबंधों के अहम पड़ाव
शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर में एक विशेष फोटो गैलरी बनाई गई है, जिसमें भारत और जापान के संबंधों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण क्षणों को प्रदर्शित किया गया है। इस गैलरी में दिसंबर 2015 में शिंजो आबे की वाराणसी यात्रा की तस्वीरें भी शामिल हैं। उस समय वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी पहुंचे थे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और व्यक्तिगत संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्मारक गलियारे में प्रदर्शित तस्वीरें भारत-जापान साझेदारी की यात्रा को दर्शाती हैं और बताती हैं कि किस तरह दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर भी भारत-जापान मित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस केंद्र की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे के सहयोग से जुड़ी रही है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। ऐसे में इसी केंद्र में शिंजो आबे की स्मृति में गलियारे का निर्माण दोनों देशों की मित्रता को एक विशेष पहचान देता है।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में शिंजो आबे की भूमिका
शिंजो आबे ने भारत और जापान के संबंधों को विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों ने भी इस सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल से भारत और जापान के संबंधों को व्यापक दृष्टिकोण मिला। शिंजो आबे की विरासत को सम्मान देने के लिए बनाया गया मेमोरियल कॉरिडोर इसी साझा इतिहास को सामने लाता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अकी आबे से मुलाकात के दौरान शिंजो आबे को याद करना भी इसी मित्रता और सम्मान की भावना को दर्शाता है। वाराणसी में स्मारक का उद्घाटन और इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की अकी आबे से मुलाकात ने भारत-जापान संबंधों में शिंजो आबे के योगदान को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह पहल दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, साझा मूल्यों और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करती है।