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शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी रही। सेंसेक्स करीब 350 अंक चढ़ा और निफ्टी 22,650 के पार पहुंचा। बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले समर्थन ने बाजार को मजबूती दी।
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार, 6 अक्टूबर को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 350 अंक मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी भी 112 अंकों के आसपास चढ़ गया। इससे पहले सोमवार को भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 0.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई थी। इस तेजी के साथ बाजार ने लगातार आठ सप्ताह की गिरावट का सिलसिला तोड़ने के बाद अपनी मजबूती को आगे बढ़ाया है। मंगलवार को व्यापक बाजार में भी खरीदारी का रुझान नजर आया और स्मॉलकैप तथा माइक्रोकैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में ज्यादा तेजी देखने को मिली।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार बढ़त
सुबह 10:48 बजे तक सेंसेक्स 348.23 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,730.70 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,668.65 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.89 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी माइक्रोकैप 250 में 1.02 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ है और वे चुनिंदा बड़े शेयरों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी खरीदारी कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों से मिला भारतीय शेयर बाजार को सहारा
मंगलवार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजारों से मिल रहा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। तकनीकी कंपनियों में मजबूत खरीदारी के चलते नैस्डैक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। एशियाई बाजारों में भी मंगलवार को ज्यादातर प्रमुख सूचकांकों में मजबूती देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा बेहतर होने का फायदा भारतीय शेयर बाजार को भी मिला है।
हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, लेकिन फिलहाल निवेशक वैश्विक इक्विटी बाजारों की मजबूती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। लंबे समय तक दबाव में रहने के बाद भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों से मिल रहा यह समर्थन निवेशकों के लिए राहत देने वाला साबित हुआ है।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर तेजी के प्रमुख केंद्र रहे। सुबह 10:48 बजे तक निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.85 प्रतिशत ऊपर था। इसी तरह निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.97 प्रतिशत और निफ्टी बैंक में 0.50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
प्रमुख बैंकिंग शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक सबसे ज्यादा मजबूत नजर आया और इसमें 3.52 प्रतिशत की तेजी रही। एक्सिस बैंक 1.14 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 0.71 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। हालिया तिमाही कारोबारी अपडेट्स में कई बैंकों ने जमा और कर्ज से जुड़े आंकड़ों में बेहतर रुझान दिखाया है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और वित्तीय क्षेत्र की कमाई को लेकर निवेशकों की उम्मीद मजबूत हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से राहत
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा एक महत्वपूर्ण कारक रही हैं, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।
शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 100.5 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 89.5-90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। हालांकि तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन हाल के स्तरों से आई नरमी ने तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कुछ राहत दी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चे तेल में लगातार और ज्यादा गिरावट आती है, तो इससे भारतीय बाजार की तेजी को और मजबूती मिल सकती है।
RBI की मौद्रिक नीति पर निवेशकों की नजर
शेयर बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर भी टिकी हुई है। आरबीआई की एमपीसी बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चल रही है और नीतिगत फैसले की घोषणा बुधवार को होनी है। बाजार में 25 आधार अंकों की रेपो दर बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इस संभावना का कुछ हिस्सा शेयरों के मौजूदा मूल्यांकन में पहले ही शामिल हो चुका है।
ऐसे में निवेशकों की नजर केवल ब्याज दर के फैसले पर नहीं, बल्कि आरबीआई के रुख और आगे की मौद्रिक नीति के संकेतों पर भी रहेगी। खासतौर पर महंगाई, आर्थिक विकास और भविष्य में ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का बयान बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बैंक शेयरों पर क्यों है निवेशकों का भरोसा?
दिलचस्प बात यह है कि संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिल रही है। ऊंची ब्याज दरें कुछ परिस्थितियों में बैंकों के मार्जिन को सहारा दे सकती हैं, खासकर तब जब कर्ज की ब्याज दरें जमा की लागत की तुलना में तेजी से समायोजित हों। इसके अलावा मजबूत कर्ज और जमा वृद्धि ने भी बैंकिंग क्षेत्र को निवेशकों के रडार पर बनाए रखा है।
कुल मिलाकर, 6 अक्टूबर की तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों में मजबूती, बैंकिंग शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आरबीआई की मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदें प्रमुख कारण नजर आ रहे हैं। हालांकि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर आरबीआई के फैसले, वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के आगामी तिमाही प्रदर्शन पर रहेगी।