Table of Contents
घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ खुले। सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली तेजी रही, जबकि आईटी शेयरों पर दबाव दिखा। निवेशकों की नजर कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड की नीति पर बनी हुई है।
घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार, 25 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। कारोबार शुरू होने के कुछ समय बाद बीएसई सेंसेक्स 86.45 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,666.99 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 30.85 अंक यानी 0.13 प्रतिशत चढ़कर 23,093.95 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में व्यापक बाजारों में भी खरीदारी का रुख देखने को मिला। हालांकि, सेक्टोरल इंडेक्स में तस्वीर मिली-जुली रही और आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा।
बैंकिंग और व्यापक बाजारों में खरीदारी
शुरुआती कारोबार में प्रमुख व्यापक सूचकांकों ने भी बाजार को सहारा दिया। निफ्टी नेक्स्ट 50 में करीब 0.21 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी बैंक 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट भी 0.16 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था।
बाजार के इस रुख से संकेत मिला कि निवेशकों की कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी जारी रही। हालांकि, पिछले सत्र की गिरावट के बाद वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बाजार में सतर्कता भी बनी हुई है।
IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह प्रमुख सेक्टोरल लूजर रहा। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स भी 0.62 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इंफोसिस करीब 1.50 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि टीसीएस में 1.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। टेक महिंद्रा भी 0.78 प्रतिशत फिसला। एचसीएलटेक और बीईएल के शेयर भी मामूली कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। आईटी शेयरों में यह दबाव वैश्विक ब्याज दरों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को लेकर बनी चिंताओं के बीच देखा गया।
Auto, Realty और PSU Bank में तेजी
जहां आईटी सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली, वहीं कुछ अन्य सेक्टरों में खरीदारी रही। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.61 प्रतिशत चढ़ा। निफ्टी ऑटो में 0.53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.35 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.30 प्रतिशत ऊपर रहा। निफ्टी मेटल में भी 0.31 प्रतिशत की तेजी देखी गई।
सेंसेक्स के शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा और एलएंडटी शुरुआती कारोबार में करीब 0.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख गेनर्स में रहे। एक्सिस बैंक 0.59 प्रतिशत ऊपर था। बजाज फाइनेंस और एसबीआई के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।
India VIX में गिरावट से मिली राहत
शुक्रवार को बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX करीब 1.93 प्रतिशत गिरकर 12.44 पर आ गया। VIX में गिरावट को आम तौर पर निकट अवधि में बाजार की अपेक्षित अस्थिरता में कमी के संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार से जोखिम पूरी तरह खत्म हो गया है।
निवेशकों की नजर फिलहाल वैश्विक ब्याज दरों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। इन कारकों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बनी बड़ी चिंता
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई नकारात्मक खबरें एक साथ आने पर बाजार में घबराहट बढ़ सकती है। उनके मुताबिक पिछले सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बीमा कमीशन से जुड़े IRDA प्रस्तावों को लेकर चिंता ने निफ्टी पर दबाव बनाया था।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन ब्रेंट क्रूड अभी भी करीब 106 डॉलर के स्तर पर बना हुआ है। साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के करीब 5.2 प्रतिशत के आसपास रहने को उन्होंने वैश्विक इक्विटी बाजारों, जिसमें भारतीय बाजार भी शामिल है, के लिए चुनौती बताया।
महंगाई और Fed की नीति पर भी नजर
विजयकुमार के अनुसार ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और लगातार बनी हुई महंगाई से अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका आम तौर पर इक्विटी बाजारों के लिए चुनौती बनती है, क्योंकि इससे बॉन्ड यील्ड और पूंजी की लागत पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं और मजबूत तेजी की संभावनाओं पर इनका असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट बाजार को राहत दे सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए क्रूड की चाल महत्वपूर्ण संकेतक बनी रह सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार में कमजोरी के बीच लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज है। विजयकुमार के मुताबिक मौजूदा कमजोरी का इस्तेमाल लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों के शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने खास तौर पर बड़े पूंजीकरण वाली कंपनियों पर ध्यान देने की बात कही, जिनके मूल्यांकन कुछ मामलों में आकर्षक हो सकते हैं।
हालांकि, बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, फेड की मौद्रिक नीति, महंगाई और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। ऐसे में शुक्रवार की शुरुआती बढ़त के बावजूद निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और कमोडिटी बाजार पर बनी रहेगी।