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73 नशा-संवेदनशील जिलों में पंजाब के 6 जिलों के उल्लेख को लेकर बलतेज पन्नू ने सवाल उठाए। उन्होंने पंजाब को बदनाम करने के आरोप लगाए।
देशभर में नशे की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 73 जिलों को ‘अल्ट्रा-सेंसिटिव’ श्रेणी में रखा है। इनमें पंजाब के छह जिले अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और लुधियाना शामिल हैं। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी और नशा मुक्ति मोर्चा के मुख्य प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने भाजपा पर निशाना साधा है।
‘73 में से बाकी 67 जिलों का जिक्र क्यों नहीं?’
बलतेज पन्नू ने सवाल उठाया कि जब देशभर में कुल 73 जिलों को नशे की समस्या के लिहाज से अल्ट्रा-सेंसिटिव बताया गया है, तो मीडिया की सुर्खियों में केवल पंजाब के छह जिलों को प्रमुखता क्यों दी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि बाकी 67 जिले किन राज्यों में हैं और उनके बारे में headlines में चर्चा क्यों नहीं हुई।
पन्नू ने आरोप लगाया कि पंजाब के छह जिलों को अलग से प्रमुखता देने का उद्देश्य राज्य की छवि को खराब करना है। हालांकि, यह पन्नू का राजनीतिक आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पंजाब के छह जिले सूची में शामिल
73 ਵਿੱਚੋਂ 67 ਨਸ਼ਾ ਪੀੜਤ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਸੂਬੇ ਦੇ, ਹੈੱਡਲਾਈਨਾਂ ‘ਚ ਇਹ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ?
ਅੱਜ ਦੇ ਅਖ਼ਬਾਰਾਂ ਦੀਆਂ ਹੈੱਡਲਾਈਨਾਂ ‘ਚ ਇਹ ਗੱਲ ਲਿਖਵਾਈ ਗਈ ਕਿ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ‘ਤੇ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਕੁੱਲ 73 ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੇ 6 ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ ਕਿਉਂ ਕਿ ਮਕਸਦ ਸੱਚਾਈ ਦੱਸਣਾ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਬਦਨਾਮ… pic.twitter.com/3UzgPvX9W6
— AAP Punjab (@AAPPunjab) September 17, 2026
केंद्र की ओर से जारी ड्रग-फ्री इंडिया 2029 रोडमैप के तहत देशभर में 272 जिलों को नशे के लिहाज से संवेदनशील माना गया है, जिनमें 73 को ‘अल्ट्रा-सेंसिटिव’ श्रेणी में रखा गया है। पंजाब के छह जिले इस सूची में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें पांच सीमावर्ती जिले—अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर—के साथ लुधियाना शामिल है।
NCB के मुताबिक, पंजाब में सूचीबद्ध छह जिलों में पठानकोट को शामिल नहीं किया गया है, जबकि वह भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा जिला है। केंद्र की योजना में नशे की सप्लाई, मांग और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई स्तरों पर काम करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘पंजाब के युवाओं का ध्यान खेलों की ओर बढ़ रहा’
बलतेज पन्नू ने अपने बयान में पंजाब के युवाओं के बीच खेल और फिटनेस गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब की अगली पीढ़ी खेल और व्यायाम की तरफ बढ़ रही है और राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे पर काम किया जा रहा है।
पन्नू ने 3,100 खेल मैदानों और युवाओं की खेलों में बढ़ती भागीदारी का हवाला दिया। उन्होंने बठिंडा रन में 25,000 से अधिक युवाओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े पन्नू द्वारा सरकार की नशा विरोधी मुहिम और खेलों को जोड़ते हुए दिए गए हैं।
भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर भी सवाल
यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू करने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा की चार यात्राएं 18 सितंबर से शुरू होकर राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से गुजरेंगी और 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होंगी।
AAP नेता ने भाजपा की इस मुहिम की टाइमिंग और उसके राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। पन्नू ने यह भी कहा कि अगर नशे के खिलाफ लड़ाई करनी है तो पूरे देश में नशे की समस्या पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
नशे के मुद्दे पर पंजाब में सियासी घमासान
73 जिलों की ‘अल्ट्रा-सेंसिटिव’ सूची सामने आने के बाद पंजाब में नशे के मुद्दे पर AAP, BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। भाजपा ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की बात कही है, जबकि AAP केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठा रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध जिलों में केवल पंजाब को राजनीतिक बहस के केंद्र में क्यों रखा जा रहा है। कांग्रेस ने भी पंजाब सरकार और केंद्र दोनों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।