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UPI के नए नियमों के तहत P2P ट्रांसफर पूरी तरह फ्री रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। जानें नए चार्ज और नियम।
डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों UPI यूजर्स के लिए सरकार ने एक अहम घोषणा की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगेगा। इसका मतलब है कि अगर आप UPI के जरिए अपने परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजते हैं, तो ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो, इसके लिए कोई फीस नहीं देनी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि P2P ट्रांसफर पर न तो किसी तरह की सीमा आधारित फीस होगी और न ही UPI ऐप या बैंक की तरफ से प्लेटफॉर्म अथवा छिपा हुआ शुल्क लगाया जा सकेगा।
P2P UPI ट्रांसफर पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
नए ढांचे के तहत Person-to-Person भुगतान को पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखा गया है। UPI के कुल ट्रांजैक्शन में P2P भुगतान की हिस्सेदारी वॉल्यूम के आधार पर करीब 37 फीसदी और वैल्यू के आधार पर लगभग 70 फीसदी बताई गई है। ऐसे में इस श्रेणी को शुल्क से बाहर रखना आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जा सकती है। रोजमर्रा में दोस्तों को पैसे भेजना, परिवार के सदस्यों को रकम ट्रांसफर करना या किसी व्यक्ति को भुगतान करना पहले की तरह बिना अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेगा।
₹2,000 तक के दुकानदार भुगतान भी फ्री
सरकार ने छोटे और रोजमर्रा के व्यापारी भुगतान को भी राहत देने की व्यवस्था जारी रखी है। ₹2,000 तक के Person-to-Merchant यानी P2M UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसका सीधा मतलब है कि ग्राहक जब किसी दुकान, छोटे कारोबारी या स्थानीय विक्रेता को ₹2,000 तक UPI से भुगतान करेगा, तो उस ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate नहीं लगाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को आम लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए आसान बनाए रखना है।
छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को भी राहत
सरकार के नए ढांचे में छोटे व्यापारियों के लिए P2PM यानी Person-to-Person-Merchant व्यवस्था के तहत जीरो MDR का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है। इसके तहत UPI QR कोड के माध्यम से हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारी MDR से मुक्त रहेंगे। इसमें स्थानीय किराना दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले अन्य व्यापारी शामिल हो सकते हैं। इससे छोटे व्यापारियों पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत का दबाव कम रखने का प्रयास किया गया है।
₹2,000 से ऊपर P2M भुगतान पर 0.4% MDR
सरकार द्वारा अधिसूचित नए ढांचे के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। यह शुल्क भुगतान से जुड़े इकोसिस्टम के विभिन्न भागीदारों, जैसे बैंक और पेमेंट ऐप प्रदाताओं के बीच साझा किया जाएगा। हालांकि, बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन के लिए अधिकतम सीमा भी तय की गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR प्रति लेनदेन ₹300 तक सीमित रहेगा।
इसका मतलब है कि बड़े व्यापारी भुगतान पर MDR की गणना निर्धारित दर से होगी, लेकिन किसी एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम राशि ₹300 से ज्यादा नहीं होगी।
रेलवे, टेलीकॉम और ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए अलग नियम
कुछ आवश्यक सेवाओं और क्षेत्रों के लिए सरकार ने अलग MDR व्यवस्था निर्धारित की है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर प्रति ट्रांजैक्शन ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। सरकार के अनुसार, ये श्रेणियां UPI P2M ट्रांजैक्शन के वॉल्यूम का करीब 17 फीसदी और मर्चेंट ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 46 फीसदी हिस्सा रखती हैं।
वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतान के लिए MDR की दर काफी कम रखी गई है। इन ट्रांजैक्शन पर 0.02 फीसदी MDR, अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा के साथ लागू होगा।
UPI ऐप नहीं लगा सकेंगे छिपे हुए चार्ज
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI ऐप प्रदाताओं को प्लेटफॉर्म फीस या किसी तरह का छिपा हुआ शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत सीधे ग्राहकों से वसूल न करें। इससे UPI भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के लिए शुल्क को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की गई है।
केवल 4 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित होने का अनुमान
सरकार के अनुसार, नए MDR ढांचे से UPI के केवल करीब 4 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित होने की संभावना है। बड़ी संख्या में लेनदेन या तो ₹2,000 से कम होंगे या फिर P2PM व्यवस्था के तहत जीरो MDR के दायरे में आएंगे। इस तरह रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतानों को शुल्क-मुक्त बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
छोटे कारोबारियों और ग्रामीण इलाकों के लिए बनेगा फंड
UPI के इस्तेमाल को छोटे व्यापारियों तक और अधिक बढ़ाने के लिए एक समर्पित फंड बनाने का भी प्रावधान किया गया है। कुल MDR कलेक्शन का 5 फीसदी हिस्सा इस फंड में जाएगा। इसका इस्तेमाल छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने और ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के विस्तार में किया जाएगा। सरकार की नई व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य डिजिटल भुगतान को आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए सुलभ बनाए रखना है, जबकि अधिक मूल्य वाले कुछ मर्चेंट भुगतान के लिए निर्धारित MDR व्यवस्था लागू करना है।