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ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मजबूत कारोबारी रिश्ते और आर्थिक साझेदारी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत पर जोर दिया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भरोसेमंद कारोबारी संबंध और आर्थिक साझेदारी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क देशों के बीच रिश्तों को अधिक स्थिर और लचीला बनाने में मदद करते हैं। मौजूदा समय में जब दुनिया कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में देशों के बीच आर्थिक सहयोग समस्याओं से निपटने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत करने में इस तरह के मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों के बीच नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव
पुतिन ने कहा कि दुनिया इस समय संरचनात्मक और गहरे बदलावों के दौर से गुजर रही है। उनके मुताबिक, 20वीं सदी के उत्तरार्ध में वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन माने जाने वाले देशों की जगह अब नए आर्थिक केंद्र तेजी से उभर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने आर्थिक केंद्रों के पास अभी भी मजबूत क्षमताएं, विकसित बुनियादी ढांचा और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियां मौजूद हैं। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव को किसी एक समूह के खत्म होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह लगातार चलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है।
बदलाव को रोकना संभव नहीं: पुतिन
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया में परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता। मानव समाज और अर्थव्यवस्था की प्रकृति ही ऐसी है कि समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के आर्थिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति का संतुलन लगातार बदल रहा है। उनके अनुसार, इन बदलावों को समझना और उनके अनुरूप आर्थिक साझेदारी विकसित करना आने वाले समय में देशों के लिए बेहद जरूरी होगा। उन्होंने संकेत दिया कि ब्रिक्स जैसे समूह इन बदलावों के बीच सदस्य देशों के आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत का किया जिक्र
पुतिन ने ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की जीडीपी में ब्रिक्स देशों का योगदान 40 प्रतिशत से अधिक रहा है। इसके मुकाबले उन्होंने जी7 देशों की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत बताई। पुतिन का यह बयान वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों में ब्रिक्स देश वैश्विक विकास के नए केंद्रों के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
भारत में आयोजित हुआ सबसे महत्वपूर्ण बिजनेस मंच
BRICS Business Forum का आयोजन भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में किया गया। यह ब्रिक्स समूह का प्रमुख निजी क्षेत्र आधारित मंच है, जिसमें सदस्य देशों के कारोबारी नेता, मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेते हैं। फोरम में व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और विकास से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाती है। इसका आयोजन आमतौर पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले किया जाता है, ताकि कारोबारी क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सुझावों को नेताओं के सामने रखा जा सके।
पीएम मोदी समेत कई बड़े नेता हुए शामिल
फोरम के लीडर्स सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ब्रिक्स देशों के कई प्रमुख नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे। ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा समेत कई अन्य गणमान्य लोगों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर फोरम का जोर
BRICS Business Forum केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि यह समूह की आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करने में भी अहम भूमिका निभाता है। फोरम में BRICS Business Council की ओर से प्रमुख सुझाव और विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। इन सिफारिशों का असर बाद में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की घोषणाओं और कार्ययोजनाओं में भी दिखाई देता है। अंतर-ब्रिक्स व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, एमएसएमई, मानकों में सहयोग और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के एकीकरण जैसे विषय इसके प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में सहयोग और स्थिरता पर फोकस
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। इसके तहत विकास, स्थिरता और नवाचार को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। भारत का जोर सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने, तकनीकी क्षमता साझा करने और वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान तलाशने पर है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था कई तरह के दबावों से गुजर रही है, ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी का महत्व और बढ़ गया है।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने में BRICS की भूमिका
BRICS अब प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसका एजेंडा विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है। वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 देश शामिल हैं। पुतिन के बयान से साफ है कि रूस ब्रिक्स को बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखता है। मजबूत कारोबारी रिश्तों, निवेश और आर्थिक साझेदारी के जरिए ब्रिक्स देश वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।