ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत 6G तकनीक में दुनिया का नेतृत्व करेगा। देश अब टेक्नोलॉजी का बाजार नहीं बल्कि निर्माता और वैश्विक मानक तय करने वाला देश बन रहा है।
भारत अब अगली पीढ़ी की मोबाइल तकनीक यानी 6G के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में कहा कि भारत का लक्ष्य केवल 6G तकनीक को अपनाना नहीं, बल्कि इसके विकास और वैश्विक मानकों को तय करने में अग्रणी भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक के लिए केवल एक बड़ा बाजार नहीं रह गया है, बल्कि देश तकनीक बनाने, प्लेटफॉर्म तैयार करने और वैश्विक तकनीकी मानक तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सिंधिया ने भारत की दूरसंचार यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश 4G के दौर में दुनिया से पीछे था, लेकिन 5G में भारत ने दुनिया के साथ कदम मिलाकर प्रगति की। अब 6G के मामले में भारत दुनिया का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का 6G मिशन शुरू हो चुका है और आने वाले वर्षों में देश इस अत्याधुनिक तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत 6G के वैश्विक मानक बनाने की तैयारी में
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि Bharat 6G Alliance पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक 6G मानकों में देश का योगदान बढ़ाना है। 6G तकनीक को मोबाइल संचार की अगली पीढ़ी माना जा रहा है, जिसमें मौजूदा 5G की तुलना में कहीं अधिक तेज डेटा ट्रांसफर, बेहद कम लेटेंसी और अत्याधुनिक डिजिटल सेवाओं की संभावनाएं होंगी।
भारत के लिए 6G सिर्फ तेज इंटरनेट की तकनीक नहीं है, बल्कि यह देश को वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने का अवसर भी है। सिंधिया के मुताबिक, भारत अब ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है जहां वह दूसरे देशों द्वारा विकसित तकनीक का उपभोक्ता भर नहीं रहेगा, बल्कि खुद नई तकनीकों और मानकों के निर्माण में योगदान देगा।
टेक्नोलॉजी के बाजार से निर्माता बनने की ओर भारत
सिंधिया ने कहा कि भारत में तकनीकी क्षेत्र को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है। लंबे समय तक भारत को तकनीक के बड़े बाजार के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। देश तकनीक बनाने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक मानकों के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत अब टेक्नोलॉजी का मार्केट, मेकर, स्टैंडर्ड डिजाइनर और प्लेटफॉर्म बिल्डर बनने की दिशा में बढ़ रहा है। यह बदलाव देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म, तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी और बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान ने भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है।
99.9 फीसदी जिलों तक पहुंची 5G क्षमता
संचार मंत्री ने भारत में 5G नेटवर्क के विस्तार को भी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि देश के 99.9 फीसदी जिलों में 5G की क्षमता पहुंच चुकी है और इससे करीब 85 फीसदी आबादी कवर हो रही है। देश में 5G के लिए 5 लाख से अधिक बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) स्थापित किए जा चुके हैं।
दूरसंचार क्षेत्र में भारत के पूंजीगत खर्च का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि इस क्षेत्र में 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत निवेश हुआ है। इससे देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिली है और इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार तेजी से हुआ है।
दुनिया की सबसे सस्ती डेटा अर्थव्यवस्था में भारत
भारत में डेटा की कीमतों में आई भारी गिरावट का भी सिंधिया ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की सबसे सस्ती डेटा अर्थव्यवस्था बन चुका है। उनके मुताबिक, देश में डेटा की कीमत पहले करीब 287 रुपये प्रति जीबी थी, जो अब घटकर लगभग 9 रुपये प्रति जीबी रह गई है।
सस्ते डेटा और व्यापक मोबाइल नेटवर्क ने डिजिटल सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका असर बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स, शिक्षा और सरकारी सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में देखने को मिला है।
मोबाइल बना नया बैंक ब्रांच
सिंधिया ने कहा कि भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी ने फिनटेक क्षेत्र के विकास को भी नई गति दी है। आज मोबाइल फोन केवल बातचीत या इंटरनेट इस्तेमाल करने का साधन नहीं है, बल्कि यह नए बैंक ब्रांच की तरह काम कर रहा है। इसी तरह उन्होंने दूरसंचार नेटवर्क को नए वित्तीय हाईवे के रूप में बताया।
आने वाले समय में फिनटेक का अगला चरण लोगों को केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सही अवसरों और सेवाओं को सही व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर होगा।
5G, भारतनेट, आधार, UPI और AI का संगम
मंत्री ने कहा कि भारत में 5G, भारतनेट, आधार, UPI, फिनटेक और AI जैसी तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। इन तकनीकों का आपसी जुड़ाव वित्तीय सेवाओं को ज्यादा तेज, सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि डिजिटल विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी की चुनौती भी बढ़ रही है। सिंधिया ने कहा कि अब जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें धोखाधड़ी होने के बाद उसका पता लगाने के बजाय पहले ही जोखिम का अनुमान लगाकर उसे रोका जा सके। यानी भविष्य की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को फ्रॉड होने से पहले उसे रोकने पर केंद्रित करना होगा।
कुल मिलाकर, भारत का 6G मिशन देश की डिजिटल यात्रा का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है। 5G के तेज विस्तार के बाद अब भारत का लक्ष्य 6G में सिर्फ तकनीक अपनाने वाला देश बनना नहीं, बल्कि नई तकनीक विकसित करने और वैश्विक मानक तय करने वाला देश बनना है।