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वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत में जापानी कंपनियों की संख्या इस दशक में दोगुनी करने पर जोर दिया। जानें भारत-जापान व्यापार और निवेश से जुड़ी अहम बातें।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं कारोबारी संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया है। जापान की चार दिवसीय यात्रा पर पहुंचे गोयल ने कहा कि भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या मौजूदा स्तर से इस दशक में दोगुनी होनी चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस यानी B2B सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत बताई। सोमवार को जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (JCCI) की जापान-भारत बिजनेस कंसल्टेटिव कमेटी (JIBCC) और भारतीय दूतावास के साथ आयोजित गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत और जापान के पास अपनी आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने की काफी संभावनाएं हैं।
जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने पर जोर
बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने भारत में मौजूद जापानी कंपनियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों को और व्यापक बनाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दशक में भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या मौजूदा स्तर से दोगुनी होनी चाहिए। गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र, तकनीकी क्षमताओं और निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। जापान लंबे समय से भारत के प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक साझेदारों में शामिल रहा है और दोनों देशों के बीच कंपनियों के स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देने से निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
2026 को साझा क्षितिज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जापान के नेताओं ने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2026 को ‘भारत-जापान साझा क्षितिज वर्ष’ (India-Japan Year of Shared Horizons) के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह अवसर दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। राजनयिक संबंधों की लंबी यात्रा के दौरान भारत और जापान ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया है। ऐसे में 75वीं वर्षगांठ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर रही है।
30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य
गोयल ने भारत के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निरंतर सुधार के सिद्धांत में विश्वास करता है और देश 2047 तक, जब स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे, करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वर्तमान में करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के लक्ष्य को महत्वाकांक्षी बताया, लेकिन कहा कि 1.4 अरब भारतीय इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने जापान को इस विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में जोड़ने की इच्छा व्यक्त की। गोयल के मुताबिक, भारत-जापान साझेदारी के भविष्य पर चर्चा करने और अगले दशक में दोनों देशों के व्यवसायों के बीच सहयोग को गहरा करने के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता।
करीब 200 कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा
भारत-जापान आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से पीयूष गोयल करीब 200 व्यवसायियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल की यात्रा में जापान के प्रमुख कारोबारी केंद्र टोक्यो, नागोया और ओसाका शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, स्टील, ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।
इस दौरे का उद्देश्य भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच नए कारोबारी अवसर तलाशना और निवेश एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। प्रतिनिधिमंडल के स्तर पर होने वाली बैठकों से दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार, तकनीक और निवेश संबंधी संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा पर भी नजर
भारत अपनी औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है। जापान इन क्षेत्रों में तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार हो सकता है। वहीं ऑटोमोबाइल, स्टील और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की कंपनियों के बीच पहले से मौजूद सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाएं भी हैं।
गोयल की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों से जुड़ी जापानी कंपनियों के साथ बातचीत होने की संभावना है। इससे भारत में निवेश बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को मजबूत करने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
ओसाका में रोडशो और कारोबारी बैठकें
चार दिवसीय यात्रा का समापन ओसाका में निवेशकों और बिजनेस रोडशो के साथ होगा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक और उपभोक्ता क्षेत्रों में काम करने वाली प्रमुख जापानी कंपनियों के साथ बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों का फोकस निवेश के अवसर, व्यापार विस्तार और भारतीय बाजार में जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर हो सकता है।
भारत जापानी कंपनियों को अपने तेजी से बढ़ते बाजार और विनिर्माण क्षमताओं से जोड़ना चाहता है, जबकि जापानी कंपनियों के लिए भारत बड़े उपभोक्ता बाजार के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला देश है।
27.47 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब डॉलर रहा। इस दौरान जापान से भारत को निर्यात करीब 21.43 अरब डॉलर और भारत से जापान को आयात करीब 6.04 अरब डॉलर रहा। व्यापार के इन आंकड़ों से दोनों देशों के बीच मजबूत कारोबारी संबंधों का संकेत मिलता है, हालांकि व्यापार संतुलन को लेकर भी भविष्य में चर्चा की गुंजाइश है।
कुल मिलाकर, पीयूष गोयल की जापान यात्रा भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश के रूप में महत्वपूर्ण है। जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य, करीब 200 कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल और सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तथा ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर जोर दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग की नई संभावनाओं को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में यदि इन प्रयासों को ठोस निवेश और कारोबारी समझौतों में बदला जाता है, तो भारत और जापान की आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण विकास इंजन साबित हो सकती है।