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Asian Stocks शुक्रवार को तेजी के साथ कारोबार करते दिखे। नरम US Inflation से Rate Hike की चिंता घटी, जबकि Middle East तनाव के बीच Brent Crude करीब 4% साप्ताहिक बढ़त की ओर।
एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को मजबूती देखने को मिली और क्षेत्रीय बाजार दो महीने में अपने सबसे बेहतर साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ते नजर आए। निवेशकों के बीच यह उम्मीद मजबूत हुई है कि अमेरिका में महंगाई के अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने से बच सकता है। ब्याज दरों को लेकर कम आक्रामक रुख की संभावना ने वैश्विक जोखिम वाली परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। हालांकि, दूसरी ओर मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में प्रगति नहीं होने और अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से बाजार की तेजी पर दबाव बना हुआ है। मौजूदा हालात में निवेशकों का ध्यान एक तरफ महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर है, तो दूसरी तरफ तेल आपूर्ति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।
नरम अमेरिकी महंगाई से बढ़ी राहत की उम्मीद
अमेरिका से आए हालिया महंगाई आंकड़ों ने बाजार को कुछ राहत दी है। आंकड़ों ने संकेत दिया कि कीमतों का दबाव फिलहाल इतना तेज नहीं है कि फेडरल रिजर्व को तुरंत ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़े। इससे अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की चिंताएं कुछ कम हुई हैं। दरों में बढ़ोतरी की संभावना घटने का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर कंपनियों की फंडिंग लागत बढ़ाती हैं और जोखिम वाली परिसंपत्तियों की अपील कम करती हैं। इसके विपरीत, यदि केंद्रीय बैंक दरों को स्थिर रखता है, तो निवेशकों को शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाली परिसंपत्तियों में बेहतर अवसर दिखाई दे सकते हैं। यही उम्मीद शुक्रवार को एशियाई बाजारों के सकारात्मक रुख का एक प्रमुख कारण बनी।
एशियाई बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत
नरम अमेरिकी महंगाई के संकेतों के बाद एशिया के कई प्रमुख बाजारों में खरीदारी का रुख मजबूत हुआ। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि क्षेत्र के अन्य बाजारों में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। हालिया कारोबारी सत्रों में खास तौर पर टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर दबाव कम होने की उम्मीद इन कंपनियों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि उनकी भविष्य की कमाई और वैल्यूएशन अक्सर ब्याज दरों में बदलाव से प्रभावित होती है। हालांकि, बाजार में पूरी तरह जोखिम लेने का माहौल अभी नहीं बना है, क्योंकि ऊर्जा कीमतों और मध्य पूर्व के घटनाक्रम को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।
ब्रेंट क्रूड में तेजी, सप्ताह में करीब 4% बढ़त
तेल बाजार में भी शुक्रवार को हलचल जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा और सप्ताह के दौरान करीब 4 प्रतिशत की बढ़त की ओर था। यह तेजी दो सप्ताह की गिरावट के सिलसिले को खत्म कर सकती है। तेल की कीमतों में मजबूती का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और नौसैनिक नाकाबंदी को आगे बढ़ाने की धमकी ने निवेशकों के बीच आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बाजार की नजर
मध्य पूर्व के मौजूदा घटनाक्रम में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है। यह वैश्विक तेल और एलएनजी परिवहन का बेहद अहम मार्ग है और यहां किसी भी लंबे व्यवधान से ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण इस मार्ग से होने वाले व्यापार और शिपिंग को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। तेल की कीमतों में तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महंगा कच्चा तेल वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव फिर बढ़ा सकता है। अगर ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में ढील देने का फैसला मुश्किल हो सकता है।
फेड की नीति और तेल के बीच फंसे बाजार
वैश्विक निवेशकों के सामने इस समय एक जटिल स्थिति है। एक तरफ नरम अमेरिकी महंगाई फेडरल रिजर्व पर दरें बढ़ाने का दबाव कम कर रही है, जिससे शेयर बाजारों को समर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ तेल की कीमतों में तेजी भविष्य की महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है। यदि मध्य पूर्व का तनाव लंबा खिंचता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो ऊर्जा कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है और केंद्रीय बैंकों को अपनी नीतियों में सावधानी बरतनी पड़ सकती है। यही विरोधाभासी संकेत फिलहाल बाजारों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनाए हुए हैं।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चुनौती
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। महंगा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और घरेलू महंगाई पर दबाव डाल सकता है। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में भी इसी चिंता का असर दिखा। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 और सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जबकि बाजार में विदेशी निवेश और वैश्विक जोखिम को लेकर भी सावधानी बनी रही।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले दिनों में एशियाई और वैश्विक शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से तीन बड़े कारकों से तय हो सकती है—अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व की नीति, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव। अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और अमेरिका-ईरान तनाव कम होता है, तो निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा और मजबूत हो सकता है। इसके उलट, तेल की कीमतों में तेज उछाल या संघर्ष बढ़ने से शेयर बाजारों पर दबाव लौट सकता है। फिलहाल एशियाई बाजारों में तेजी का माहौल जरूर है, लेकिन निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। नरम अमेरिकी महंगाई ने राहत दी है, मगर मध्य पूर्व का संकट बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। इसलिए आने वाले कारोबारी सत्रों में आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ तेल बाजार और कूटनीतिक घटनाक्रम पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।