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NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI चार्जशीट में 3 NTA एक्सपर्ट को कथित मुख्य स्रोत बताया गया है। जांच में पेपर लीक नेटवर्क और लाखों की डील का खुलासा हुआ।
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञ कथित तौर पर पेपर लीक के प्राथमिक स्रोत थे। इनमें केमिस्ट्री के विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी, फिजिक्स की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार और बॉटनी-जूलॉजी की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मांधरे शामिल हैं। एजेंसी ने हाल ही में पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के समक्ष अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है। चार्जशीट में पेपर तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया से लेकर कथित तौर पर उम्मीदवारों तक प्रश्न पहुंचने तक की पूरी कड़ी का विवरण दिया गया है।
गोपनीय सेक्शन से प्रश्न बाहर निकालने का आरोप
CBI के अनुसार, इन तीनों विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र के अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान रफ वर्क के लिए गोपनीय सेक्शन में सादे कागज उपलब्ध कराए गए थे। जांच में आरोप लगाया गया है कि केमिस्ट्री विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी ने इन कागजों का इस्तेमाल 135 केमिस्ट्री प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को छोटे-छोटे नोट्स के रूप में लिखने के लिए किया। चार्जशीट में कुलकर्णी को कथित तौर पर पेपर लीक का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने कुछ आसान प्रश्नों को याद किया और बाद में होटल लौटकर उन्हें कागज पर लिख लिया।
NTA के गोपनीय सेक्शन में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
CBI ने अपनी चार्जशीट में NTA की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, विशेषज्ञों के गोपनीय सेक्शन में प्रवेश और बाहर निकलने के दौरान पर्याप्त जांच या फ्रिस्किंग नहीं की गई। इसके अलावा, दिल्ली स्थित NTA कार्यालय में ऐसा कोई समर्पित CCTV लाइव फीड मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं था, जिससे विशेषज्ञों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। CBI का मानना है कि इसी कमी के कारण कथित तौर पर प्रश्नों को बाहर ले जाने की गतिविधियां निगरानी से बच गईं।
बॉटनी-जूलॉजी विशेषज्ञ पर भी गंभीर आरोप
चार्जशीट के अनुसार, मनीषा गुरुनाथ मांधरे NTA में बॉटनी के लिए अंग्रेजी से मराठी अनुवाद और जूलॉजी के लिए बैक-ट्रांसलेशन का काम कर रही थीं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि दिन का काम पूरा करने के बाद होटल लौटकर वह NCERT की किताबों में संबंधित पैराग्राफ को चिन्हित करती थीं। दशकों के अनुभव के कारण वह प्रश्नों को NCERT की पाठ्यपुस्तक सामग्री से आसानी से जोड़ लेती थीं। CBI के मुताबिक, कथित लीक हुआ बायोलॉजी मटेरियल मांधरे द्वारा उपलब्ध कराए गए नोट्स की फोटोकॉपी पर आधारित पाया गया।
फिजिक्स विशेषज्ञ पर भी प्रश्न नोट करने का आरोप
फिजिक्स की अनुवादक मनीषा संजय हवलदार पर भी प्रश्नों को बाहर ले जाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि वह दिन का अनुवाद कार्य पूरा करने के बाद दिल्ली स्थित अपने ठहरने के स्थान पर लौटती थीं और वहां प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में नोट करती थीं। CBI ने बताया कि बाद में डिजिटल उपकरणों से बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच भी की गई।
विशेषज्ञों से उम्मीदवारों तक पहुंचा कथित पेपर
CBI ने अपनी चार्जशीट में कथित पेपर लीक की पूरी श्रृंखला का एक फ्लो चार्ट भी प्रस्तुत किया है। इसके अनुसार, विषय विशेषज्ञों से प्रश्न कथित तौर पर कई बिचौलियों और मददगारों तक पहुंचे। इनमें तेजस हर्षदकुमार शाह, डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे, शिवराज मोटेगांवकर, धनंजय निवृत्ति लोखंडे और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के नाम शामिल हैं। जांच के मुताबिक, इनमें से कुछ लोग कोचिंग संस्थान या कंसल्टेंसी चलाते थे। इसके बाद कथित तौर पर लीक हुए प्रश्न राजस्थान और हरियाणा समेत अलग-अलग राज्यों के उम्मीदवारों तक पहुंचाए गए।
लाखों रुपये में प्रश्नपत्र बेचने का आरोप
चार्जशीट में उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार, शुभम मधुकर खैरनार ने कथित तौर पर उम्मीदवारों से पैसे लिए, उनके शैक्षणिक दस्तावेज और सुरक्षा के तौर पर खाली चेक भी हासिल किए। इसके बाद वह लीक हुए प्रश्नों के आगे वितरण से जुड़े लोगों के संपर्क में रहा। CBI के अनुसार, कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग से कथित साजिश की योजना और पैसों से जुड़े लेन-देन के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि कुछ रिकॉर्डिंग में परीक्षा से चार दिन पहले PDF या हार्ड कॉपी के रूप में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की चर्चा सामने आई। कथित तौर पर कीमत 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये तक तय करने की बातचीत भी हुई। इसके अलावा कुछ उम्मीदवारों के लिए 150 प्रश्नों की विशेष व्यवस्था और अन्य खरीदारों के लिए 450 प्रश्नों के एक अलग सेट की बात भी रिकॉर्डिंग में सामने आने का दावा किया गया है।
मनीषा वाघमारे को बताया गया कथित मुख्य कड़ी
CBI ने मनीषा संजय वाघमारे को भी कथित साजिश में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में शामिल बताया है। चार्जशीट के अनुसार, वह उम्मीदवारों और विषय विशेषज्ञों के बीच कथित संपर्क सूत्र के रूप में काम कर रही थीं। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने कुलकर्णी और मनीषा मांधरे से कथित तौर पर लीक सामग्री हासिल की और उम्मीदवारों को विशेष कक्षाओं के लिए भेजा। इसके बदले छात्रों और उनके अभिभावकों से पैसे लेने तथा परीक्षा से पहले कथित लीक प्रश्नों को धनंजय लोखंडे तक पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है।
फोरेंसिक जांच से मिले अहम सबूत
CBI की अंतिम रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेज परीक्षक (GEQD) की फोरेंसिक जांच को भी अहम सबूत के रूप में पेश किया गया है। एजेंसी के अनुसार, डिजिटल उपकरणों से बरामद 68 फिजिक्स प्रश्नों की जांच में उनकी लिखावट को आरोपी मनीषा हवलदार और तेजस शाह से जोड़ा गया। वहीं, अलग-अलग उम्मीदवारों और बिचौलियों से बरामद केमिस्ट्री प्रश्न सेटों को कुलकर्णी के कथित नोट्स से फोरेंसिक तौर पर जोड़ा गया। बायोलॉजी से संबंधित लीक सामग्री को भी मनीषा मांधरे के नोट्स की फोटोकॉपी पर आधारित बताया गया है।
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, जांच में विशेषज्ञों, बिचौलियों और उम्मीदवारों के बीच कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। एजेंसी ने सुरक्षा व्यवस्था की कमियों, डिजिटल और ऑडियो साक्ष्यों तथा फोरेंसिक रिपोर्ट को मामले में महत्वपूर्ण आधार बनाया है। अब इस मामले में अदालत के समक्ष पेश की गई चार्जशीट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।