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संसद में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने पेपर लीक, NEET छात्रों की समस्याओं और सरकार के नए एंटी पेपर लीक कानून के प्रावधानों पर विस्तार से अपनी बात रखी। जानें नए कानून की प्रमुख बातें।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों के बीच संसद में पब्लिक एग्जामिनेशंस (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर हुई चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने छात्रों की समस्याओं, परीक्षा प्रणाली की चुनौतियों और सरकार द्वारा लाए गए नए कानून पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह कानून भारत का पहला व्यापक एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है ताकि मेहनती छात्रों का भविष्य किसी संगठित गिरोह या तकनीकी दुरुपयोग की वजह से प्रभावित न हो।
‘एक व्हाट्सऐप मैसेज से बर्बाद हो जाती है वर्षों की मेहनत’
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में कहा कि लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। कई विद्यार्थी प्रतिदिन 16 से 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जबकि परीक्षा केवल कुछ घंटों की होती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति कैमरा फोन से प्रश्नपत्र की तस्वीर लेकर व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए उसे लीक कर देता है, तो छात्रों की वर्षों की मेहनत, उनके सपने और पूरा भविष्य खतरे में पड़ जाता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं बल्कि युवाओं के विश्वास और देश की मेरिट आधारित व्यवस्था पर सीधा हमला है।
‘पेपर लीक का इलाज केवल बयानबाजी नहीं’
सांसद ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल मीडिया में बयान देने या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कैंसर का इलाज केवल दर्द निवारक दवा से संभव नहीं होता, उसी तरह पेपर लीक जैसी बीमारी का इलाज भी मजबूत संस्थागत व्यवस्था और कठोर कानून से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसी सोच के साथ नया कानून तैयार किया है, जो परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
NEET छात्रों से कहा- आपका दर्द पूरी तरह जायज
राघव चड्ढा ने विशेष रूप से NEET परीक्षा के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका गुस्सा और उनकी पीड़ा पूरी तरह उचित है। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुना गया और सरकार ने उनके सुझावों के आधार पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने अपनी चिंता प्रधानमंत्री के सामने रखी तो उसे केवल एक प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के मुखिया की तरह सुना गया। सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कई ऐतिहासिक कदम उठाने का निर्णय लिया।
‘परीक्षा की तैयारी केवल छात्र नहीं, पूरा परिवार करता है’
अपने भाषण में राघव चड्ढा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और उनके परिवारों के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र NEET जैसी परीक्षा की तैयारी करता है तो केवल वही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार त्याग करता है। मां अपनी जरूरतों में कटौती करती है, पिता अपनी बचत को कोचिंग, किराया और पढ़ाई पर खर्च करता है। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। छात्र घर से दूर रहकर दिन-रात पढ़ाई करते हैं, त्योहारों, दोस्तों, सोशल मीडिया और आराम से दूरी बना लेते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास होता है कि उनकी मेहनत उन्हें सफलता दिलाएगी। लेकिन जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है तो केवल परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपने टूट जाते हैं।
सरकार ने उठाए त्वरित और दीर्घकालिक कदम
राघव चड्ढा ने बताया कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद सरकार ने तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई की। छात्रों का एक वर्ष खराब न हो इसलिए दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। मामले की जांच CBI को सौंपी गई और विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्य सरगना समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा 75 दिनों के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसके अलावा NTA के 47 अधिकारियों को हटाया गया, शिक्षा सचिव का तबादला किया गया, तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया और छात्रों पर दर्ज प्रदर्शन संबंधी मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है ताकि पेपर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो सके। साथ ही नंदन नीलेकणी सहित विशेषज्ञों की एक हाई पावर टास्क फोर्स भी बनाई गई है, जो परीक्षा सुधारों पर काम करेगी।
नए कानून में कठोर सजा और तेज न्याय व्यवस्था
राघव चड्ढा ने कहा कि नया कानून केवल छोटे अपराधियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा। यदि किसी पेपर लीक में कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक एजेंसियां, सॉल्वर गैंग, परीक्षा अधिकारी या कोई अंदरूनी व्यक्ति शामिल पाया जाता है तो सभी के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होगी। कानून के तहत दोषियों को 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सभी अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया है। जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई कर तीन महीने के भीतर फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है।
‘छात्रों का आंदोलन राजनीति से दूर रहना चाहिए’
अपने भाषण में राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, सवाल पूछने और अदालत का दरवाजा खटखटाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के आंदोलन को किसी राजनीतिक दल का मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी आवाज किसी राजनीतिक दल को आउटसोर्स न करें क्योंकि उनकी लड़ाई परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी विशेष की नहीं, बल्कि “मेरिट बनाम माफिया और मेहनत बनाम सेटिंग” की लड़ाई है।
‘अब सवाल नहीं, समाधान देने का समय’
भाषण के अंत में राघव चड्ढा ने कहा कि जब वह विपक्ष में थे तब सरकार से सवाल पूछना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी समाधान देना है। उन्होंने कहा कि वह रोज कैमरे के सामने बयान देकर सुर्खियां बटोर सकते थे, लेकिन उनका उद्देश्य केवल चर्चा में रहना नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने संसद में उसी समय बोलना उचित समझा जब सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कानून लेकर आई। उनके अनुसार यह कानून केवल वर्तमान समस्या का समाधान नहीं बल्कि भविष्य में लाखों छात्रों के सपनों की सुरक्षा का भी मजबूत आधार बनेगा।