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कांवड़ यात्रा 2026: दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर 30 जुलाई से भारी वाहन और 4 से 12 अगस्त तक सभी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। जानें रूट डायवर्जन और सुरक्षा इंतजाम।
सावन महीने की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत में प्रसिद्ध वार्षिक कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गृह क्षेत्रों के शिव मंदिरों की ओर लौटने वाले लाखों श्रद्धालुओं (कांवड़ियों) की सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस एवं जिला प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में व्यापक फेरबदल की घोषणा की है। प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 30 जुलाई से दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) और गंगा नहर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। वहीं, यात्रा के चरम समय के दौरान 4 अगस्त से 12 अगस्त तक इन मार्गों पर सभी प्रकार के निजी एवं व्यावसायिक वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
30 जुलाई से 12 अगस्त तक लागू रहेगा रूट डायवर्जन और यातायात प्रतिबंध
पुलिस प्रशासन द्वारा तैयार की गई यातायात कार्ययोजना (Traffic Plan) के अनुसार, इस वर्ष की कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और पैदल यात्रा मार्ग को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यातायात नियंत्रण के कड़े कदम उठाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक (यातायात) अतुल कुमार चौबे ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि 30 जुलाई की मध्यरात्रि से दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे और पटरी मार्ग (गंगा नहर मार्ग) पर ट्रकों, बसों और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया जाएगा। इन वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा।
जैसे-जैसे कांवड़ियों की संख्या बढ़ेगी, यातायात नियमों को और अधिक सख्त किया जाएगा। 4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच यह पूरा मार्ग केवल पदयात्रियों और कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगा। इस अवधि के दौरान इस मार्ग पर हल्के वाहनों, जैसे कार, बाइक और ऑटो-रिक्शा के संचालन की भी अनुमति नहीं होगी। एसपी ट्रैफिक ने स्पष्ट किया कि दिल्ली-हरिद्वार राजमार्ग के एक विशेष हिस्से को पूरी तरह से कांवड़ियों के लिए आरक्षित (Reserved Zone) घोषित किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सके।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गंगा नहर तट पर गोताखोर तैनात
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा नहर के किनारे बने विभिन्न घाटों पर स्नान करते हैं और जल भरते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने जल सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं। ज़िलाधिकारी (DM) उमेश मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। गंगा नहर मार्ग पर स्थित सभी प्रमुख और संवेदनशील स्नान घाटों पर प्रशिक्षित पुलिस गोताखोरों (Police Divers) और जल पुलिस की टीमों को तैनात किया जाएगा। यह कदम नहर के तेज बहाव के कारण होने वाली संभावित डूबने की घटनाओं को रोकने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के लिए उठाया गया है। इसके अतिरिक्त, स्नान घाटों पर चेंजिंग रूम, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा शिविरों का भी निर्माण किया जा रहा है।
रामपुर तिराहा पर अस्थाई पुलिस थाना स्थापित: सुरक्षा का ढांचा
कांवड़ यात्रा के व्यापक प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ऐतिहासिक रामपुर तिराहा पर एक विशेष अस्थाई पुलिस स्टेशन (Temporary Police Station) का गठन किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार ने जानकारी दी कि इस अस्थाई थाने का प्रभार सब-इंस्पेक्टर सुभाष चंद को सौंपा गया है, जो इस क्षेत्र के SHO के रूप में कार्य करेंगे।
इस अस्थाई थाने में लगभग 20 पुलिस कर्मियों की एक समर्पित टीम तैनात की गई है, जो चौबीसों घंटे रामपुर तिराहा और आसपास के क्षेत्रों में गश्त करेगी। यह केंद्र यातायात नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, खोया-पाया केंद्र का संचालन करने और यात्रियों को आपातकालीन सहायता प्रदान करने के मुख्य नोडल बिंदु के रूप में कार्य करेगा।
श्रद्धालुओं और आम यात्रियों के लिए प्रशासनिक अपील
प्रशासन ने आसपास के जिलों के निवासियों, वाहन चालकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच दिल्ली से हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश की यात्रा करते समय जारी की गई रूट डायवर्जन गाइडलाइंस का पालन करें। कांवड़ यात्रा के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए आम यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे NH-58 के बजाय पूर्व-निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें ताकि उन्हें अनावश्यक ट्रैफिक जाम और असुविधा का सामना न करना पड़े।