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भारत में चीन के नए डिफेंस अटैची Rear Admiral Yu Jian ने भारतीय सेना का आभार जताया है। केरल तट के पास 12 चीनी नागरिकों को बचाने के लिए उन्होंने कहा कि चीन इस मदद को कभी नहीं भूलेगा।
भारत में चीन के नए डिफेंस अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने भारतीय सेना की जमकर तारीफ करते हुए उनका दिल से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने पिछले साल जून में केरल तट के पास एक दुर्घटनाग्रस्त कार्गो जहाज से 12 चीनी चालक दल के सदस्यों (क्रू मेंबर्स) को सुरक्षित बचाने के लिए भारतीय सेना की बहादुरी और मानवीय सहायता को याद किया। रियर एडमिरल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीन भारतीय सेना द्वारा समय पर दी गई इस मदद और जीवन रक्षा को कभी नहीं भूलेगा।
रियर एडमिरल यू जियान ने यह बयान मंगलवार को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और चीन को एक-दूसरे के बेहद महत्वपूर्ण पड़ोसी देश बताते हुए कहा कि दोनों ही राष्ट्र इस समय विकास और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के एक अहम और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहे हैं।
केरल तट के पास की घटना का जिक्र और यूएन शांति अभियानों में योगदान
गौरतलब है कि पिछले साल जून के महीने में केरल तट के पास समुद्र में एक मालवाहक (कार्गो) जहाज भीषण आग और विस्फोट की चपेट में आ गया था। उस विकट परिस्थिति में भारतीय सेना और तट रक्षक बल (Indian Coast Guard) ने तत्परता दिखाते हुए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और जहाज पर सवार सभी 12 चीनी नागरिकों की जान बचाई थी।
इस घटना का विशेष उल्लेख करते हुए रियर एडमिरल यू जियान ने कहा:
“हम यह कभी नहीं भूलेंगे कि पिछले जून में केरल तट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए मालवाहक जहाज से भारतीय सेना ने 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला था। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने वैश्विक शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसके लिए बड़े बलिदान भी दिए हैं।”
‘मतभेदों से कहीं बड़े हैं भारत और चीन के साझा हित’
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य कूटनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए यू जियान ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन का हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत और चीन के साझा हित दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों से कहीं अधिक बड़े, व्यापक और महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति के कारण ही भारत-चीन संबंध एक बार फिर से सुधार और सकारात्मक विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह बदलाव न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक शुभ संकेत है।
सैन्य और राजनयिक संवाद बनाए रखने की प्रतिबद्धता
दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने की इच्छा जताते हुए यू जियान ने स्पष्ट किया कि चीन, भारत के साथ लगातार संपर्क में रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन राजनयिक (Diplomatic) और सैन्य (Military) दोनों स्तरों पर भारत के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का पक्षधर है।
उन्होंने आगे कहा कि निरंतर बातचीत के माध्यम से ही:
- दोनों देशों की सेनाओं और सरकारों के बीच आपसी विश्वास (Mutual Trust) को बढ़ाया जा सकता है।
- रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
- दोनों देशों की जनता के हित और कल्याण के लिए साझा प्रयास किए जा सकते हैं।
- अपने संबोधन के समापन पर चीनी डिफेंस अटैची ने भारत-चीन संबंधों में लगातार सुधार, प्रगति और स्थायी शांति की मंगलकामना की।
भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे लौट रही है सामान्यता
हाल के समय में नई दिल्ली और बीजिंग के बीच बिगड़े संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए लगातार कूटनीतिक और शीर्ष स्तरीय प्रयास किए गए हैं। हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा था कि भारत और चीन ऐसे पड़ोसी हैं जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठकों के बाद दोनों देशों के वरिष्ठ प्रशासनिक व सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखने और संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य (Normalisation) बनाने के उद्देश्य से दोनों पक्ष अब रचनात्मक और सकारात्मक संवाद की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।