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सिक्किम के नामची में निर्माणाधीन टनल में मीथेन गैस धमाके से बड़ा हादसा। 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी। पीएम मोदी और सीएम तमांग ने मुआवजे का किया ऐलान।
सिक्किम से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। राज्य के नामची जिले में निर्माणाधीन एक सुरंग (टनल) में अचानक हुए विस्फोट और उसके ढहने से 20 मजदूरों की मौत की खबर सामने आई है। यह हादसा 20 जुलाई 2026 (सोमवार) को उस समय हुआ, जब मजदूर टनल के भीतर काम कर रहे थे। घटना के तुरंत बाद से ही युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे व जहरीली गैस के बीच फंसे अन्य लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
नामची की पुलिस अधीक्षक (एसपी) सोनम डी भूटिया ने मंगलवार को मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि टनल के भीतर फंसे 25 लोगों में से 20 की जान जा चुकी है। विभिन्न राहत एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त तलाशी अभियान में 12 शवों को बाहर निकाल लिया गया है, जिनमें से सात की पहचान हो चुकी है और अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
संदिग्ध मीथेन गैस बना हादसे का कारण
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हादसा चट्टानों के अंदर फंसी संदिग्ध मीथेन गैस में अचानक हुए विस्फोट के कारण हुआ। टनल की खुदाई के दौरान जैसे ही गैस का रिसाव हुआ, वहाँ तेज धमाका हो गया।
इस विस्फोट के कारण टनल का एक हिस्सा ढह गया और पूरी सुरंग में घना धुआं व जानलेवा जहरीली गैसें फैल गईं। विषैली गैस और घने धुएं की वजह से शुरुआत में बचाव दल को भी टनल के अंदर प्रवेश करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की त्वरित प्रतिक्रिया और मुआवजा राशि
दर्दनाक हादसे के तुरंत बाद सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की और राहत कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए वित्तीय सहायता और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी किए:
- मृतकों के परिजनों को सहायता: राज्य सरकार ने हादसे में मारे गए प्रत्येक मजदूर के परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।
- घायलों का इलाज: हादसे में घायल हुए सभी मजदूरों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद और मुफ्त इलाज देने की घोषणा की गई है।
- विशेष समिति का गठन: मुख्यमंत्री तमांग ने स्पष्ट किया कि मीथेन गैस विस्फोट और सुरंग ढहने के कारणों की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच समिति (Special Committee) गठित की जाएगी, जो इस लापरवाही या प्राकृतिक घटना की गहन पड़ताल करेगी।
इसके साथ ही, राज्य के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सिक्किम विधानसभा ने टनल हादसे में मारे गए मजदूरों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा।
केंद्र सरकार का सहयोग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया हालात का जायजा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने स्थिति की पूरी जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से बचाव व राहत कार्यों में हर संभव मदद का भरोसा दिया।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से भी पीड़ितों के लिए सहायता का ऐलान किया गया:
- मृतकों के परिवारों को: केंद्र की तरफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि।
- घायलों के लिए: केंद्र की ओर से 50,000 रुपये की मदद।
राहत और बचाव कार्य में जुटीं केंद्रीय एजेंसियां
सिक्किम के इस दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बचाव कार्य आसान नहीं है। टनल के भीतर अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और NHPC की विशेष टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं।
सुरंग से जहरीली गैसों को बाहर निकालने के लिए हेवी-ड्यूटी वेंटिलेशन पाइप्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, मलबे को हटाने और फंसे हुए मजदूरों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए उन्नत मशीनों की मदद ली जा रही है।
भारत में टनल हादसों की बढ़ती चिंता
सिक्किम की यह दुखद घटना देश में टनल निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों और भूगर्भीय (Geological) चुनौतियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। इससे पहले मार्च 2025 में तेलंगाना में भी एक बड़ा टनल हादसा हुआ था, जहाँ निर्माणाधीन सुरंग धंसने से कई मजदूर फंस गए थे और उन्हें निकालने के लिए घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा था।
हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान मीथेन जैसी विस्फोटक गैसों का पता लगाने के लिए अधिक उन्नत ‘गैस डिटेक्शन सिस्टम’ और आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। फिलहाल, सभी की निगाहें सिक्किम रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं और हर कोई फंसे हुए मजदूरों के सकुशल बाहर आने की प्रार्थना कर रहा है।