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भारतीय-यूक्रेनी मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से आईएसएस के लिए रवाना हो गए हैं। वह वहां 8 महीने तक एआई और चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।
मंगलवार को अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा गया, जब नासा (NASA) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों (Cosmonauts) को लेकर सोयुज एमएस-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। आठ महीने के इस लंबे मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान करना है। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के इस यान ने कजाकिस्तान के ऐतिहासिक बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे उड़ान भरी और मात्र तीन घंटे की यात्रा के बाद अंतरिक्ष स्टेशन के ‘प्रिचाल’ (Prichal) मॉड्यूल से सफलतापूर्वक जुड़ गया।
अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि
यह मिशन 49 वर्षीय अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष उड़ान है, जबकि उनके साथ गए रूसी अंतरिक्ष यात्रियों—प्योत्र दुब्रोव (Pyotr Dubrov) और अन्ना किकिना (Anna Kikina) का यह दूसरा अंतरिक्ष सफर है। अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था, लेकिन उनकी जड़ें भारत और यूक्रेन से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता के. पी. शंकरन मेनन भारत में केरल के पलक्कड़ जिले (ओट्टपलम) के रहने वाले हैं, जबकि उनकी मां एलिजाबेथ यूक्रेन से अमेरिका आई एक अप्रवासी हैं। इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण के गवाह बनने के लिए अनिल मेनन की पत्नी अन्ना विल्हेम (जो खुद एक अंतरिक्ष यात्री हैं) और नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन भी बैकोनूर कॉस्मोड्रोम में मौजूद थे। विशेष बात यह है कि अनिल मेनन की पत्नी अन्ना सितंबर 2024 में स्पेसएक्स (SpaceX) के ऐतिहासिक ‘पोलारिस डॉन’ (Polaris Dawn) निजी मिशन के तहत पहले ही अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं।
रॉकेट के साथ अंतरिक्ष पहुंचे भारतीय बच्चों के चित्र
इस मिशन में भारत और रूस के बीच गहरे सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संबंधों की झलक भी देखने को मिली। रूस की मानवीय सहयोग एजेंसी ‘रोसोट्रुडनिचेस्टवो’ की प्रमुख येलेना रेमिज़ोवा के अनुसार, सोयुज रॉकेट अपने साथ भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र भी लेकर गया है। ये चित्र ‘फर्स्ट फॉरएवर’ (First Forever) प्रतियोगिता के विजेताओं द्वारा बनाए गए हैं, जो दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन की अंतरिक्ष उड़ान की 65वीं वर्षगांठ और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत-रूस के ऐतिहासिक सहयोग को समर्पित हैं।
एक असाधारण जीवन: डॉक्टर से लेकर स्पेस फोर्स कर्नल तक
अनिल मेनन का अब तक का करियर बेहद प्रेरणादायक और बहुआयामी रहा है। वह एक आपातकालीन चिकित्सा चिकित्सक (Emergency Medicine Physician) होने के साथ-साथ अमेरिकी स्पेस फोर्स (US Space Force) में कर्नल भी हैं। अमेरिकी वायु सेना में रहते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में ‘ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम’ के दौरान अग्रिम मोर्चे पर सेवाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने ‘हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन’ के सदस्य के रूप में माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों का इलाज भी किया। भारत से उनका नाता सिर्फ पारिवारिक नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियानों का अध्ययन और समर्थन करने के लिए एक रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर के रूप में भारत में एक साल का समय भी बिताया है।
नासा और स्पेसएक्स में महत्वपूर्ण योगदान
मेनन ने 2014 में एक फ्लाइट सर्जन के रूप में नासा में अपने करियर की शुरुआत की थी, जहाँ उन्होंने आईएसएस (ISS) पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की देखभाल की। इसके बाद, 2018 में वह एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) से जुड़े। स्पेसएक्स में उन्होंने कंपनी के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Human Spaceflight Program) के लिए चिकित्सा विभाग की स्थापना की और मनुष्यों को मंगल व चंद्रमा पर ले जाने वाले दुनिया के सबसे भारी रॉकेट ‘स्टारशिप’ (Starship) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिसंबर 2021 में नासा ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना, जिसके बाद उन्होंने अपना कड़ा प्रशिक्षण पूरा किया।
अंतरिक्ष में होने वाले महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग
अपने आठ महीने के प्रवास के दौरान अनिल मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कई जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे। एक डॉक्टर होने के नाते, उनका मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। वह माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) में अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त प्रवाह, नसों की संरचना और रक्त के घटकों में होने वाले बदलावों का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा, वह भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों (जैसे मंगल मिशन) के लिए स्टेशन के पीने के पानी की प्रणाली का उपयोग करके अंतःशिरा तरल पदार्थ (Intravenous Fluids/IV) बनाने की तकनीक का परीक्षण करेंगे। वह कंप्यूटर, एआई (AI) और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के लिए अंतरिक्ष में ही सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तकनीक पर भी काम करेंगे। साथ ही, वह ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और एआई-आधारित अल्ट्रासाउंड तकनीकों का परीक्षण करेंगे, ताकि भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से किसी डॉक्टर की मदद के बिना खुद का इलाज करने में सक्षमता मिल सके। यह मिशन अप्रैल 2027 में उनकी पृथ्वी पर वापसी के साथ समाप्त होगा।