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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले पर कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और मंदिर में अभेद सुरक्षा प्रणाली लागू की जाएगी।
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे (दान) की गिनती के दौरान हुई चोरी की घटना ने पूरे देश के रामभक्तों को स्तब्ध और व्यथित कर दिया है। इस संवेदनशील मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने एक विस्तृत और भावुक बयान जारी किया है। उन्होंने इस घटना को ‘अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और शर्मनाक’ करार देते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया है कि वे 5 जुलाई को अपनी पूर्व निर्धारित श्रीमद्भागवत कथा पूर्ण कर सीधे अयोध्या पहुंच रहे हैं ताकि स्थिति का जायजा ले सकें।
‘दोषी चाहे कितना भी बड़ा हो, उसे बख्शा न जाए’
स्वामी गोविंद देव गिरी ने अपने संबोधन में रामभक्तों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए कहा कि प्रभु श्री राम की सेवा के लिए समर्पित धनराशि का इस प्रकार दुरुपयोग करना एक जघन्य महापाप है। उन्होंने जांच एजेंसियों पर अपना भरोसा जताते हुए कहा कि SIT और पुलिस को इस मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली या बड़े पद पर क्यों न बैठा हो, नाम और पद का विचार किए बिना उसे कानून के जरिए सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।” स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि वे सत्य के साथ हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के भक्त होने के नाते मर्यादा का पालन करना उनका धर्म है।
कोषाध्यक्ष के रूप में स्पष्टीकरण और पारदर्शिता
अपने बयान के 10 बिंदुओं के माध्यम से स्वामी गोविंद देव गिरी ने अपनी भूमिका, मंदिर की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोषाध्यक्ष के नाते उन्होंने आज तक एक भी रुपया निजी खर्च या यात्रा के लिए न्यास से नहीं लिया है। मंदिर के आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा ऑडिटेड है और अधिकृत व्यक्ति इसकी कभी भी जांच कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का सारा भुगतान सीधे बैंक ट्रांसफर के जरिए होता है और वे अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया और उसका स्थान उनके कार्यक्षेत्र से बाहर रहा है, जिसे स्थानीय न्यासी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित किया जाता है।
भविष्य के लिए अभेद सुरक्षा और प्रबंधन का संकल्प
स्वामी गोविंद देव गिरी ने स्वीकार किया कि चोरी का यह सिलसिला पिछले काफी समय से चल रहा था, जो कि अत्यंत लज्जाजनक है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के अन्य सम्मानित सदस्यों से आग्रह किया है कि भविष्य में दान की पाई-पाई की सुरक्षा के लिए ‘अभेद व्यवस्था’ सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह पर एक ऐसी प्रबंधन प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया है जिसमें ‘अचूक निरीक्षण’ (Fail-safe monitoring) हो और दानपात्र की गिनती में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। उनका मानना है कि मंदिर का प्रबंधन ऐसा होना चाहिए जो विश्व के लिए एक आदर्श स्थापित करे।
रामराज्य की ओर बढ़ते कदम और अटूट विश्वास
अंत में स्वामी गोविंद देव गिरी ने आशा व्यक्त की कि भगवान श्रीराम की कृपा से इस प्रकरण से जुड़े संशय के बादल जल्द ही छंट जाएंगे और सच सामने आएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य धर्म की छवि को धूमिल नहीं कर सकते। रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे रामराज्य लाने की दिशा में अपनी साधना निरंतर जारी रखेंगे। स्वामी जी के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहा है और दोषियों को किसी भी हाल में माफी नहीं दी जाएगी।
इस घटना ने मंदिर प्रशासन के लिए सतर्कता बरतने की एक बड़ी चुनौती पेश की है, लेकिन कोषाध्यक्ष का दृढ़ संकल्प रामभक्तों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। “धर्म की जय हो” के उद्घोष के साथ उन्होंने पुनः दोहराया कि वे इस अपराध के अंधकार को दूर करने और मंदिर की पवित्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।