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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे की खबरों का खंडन किया। जानिए भारत-चीन सीमा पर वर्तमान हालात और सेना की रणनीतिक प्राथमिकताएं।
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने और वहां कैंप लगाने संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्टें सामने आई थीं। भारतीय सेना ने इन दावों का पुरजोर खंडन करते हुए इन्हें “गलत और पूरी तरह से बेबुनियाद” करार दिया है। सेना ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को लेकर फैलाई जा रही ऐसी भ्रामक खबरें वास्तविक धरातल से कोसों दूर हैं। यह स्पष्टीकरण न केवल सीमा सुरक्षा को लेकर सेना की सतर्कता को दर्शाता है, बल्कि सूचना युद्ध (Information Warfare) के इस दौर में जिम्मेदारीपूर्ण पत्रकारिता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
सीमा पर स्थिति: स्थिरता और सतर्कता का संतुलन
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सीमा पर जारी तनाव और स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, चीन सीमा पर वर्तमान स्थिति ‘स्थिर’ है, लेकिन साथ ही यह अत्यंत ‘संवेदनशील’ भी बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हालांकि हालात नियंत्रण में हैं, फिर भी किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक है। जनरल द्विवेदी ने यह भी जानकारी दी कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच जमीनी स्तर पर समन्वय को लेकर हर साल 1100 से अधिक बार संवाद होता है। यह संवाद रोजमर्रा के छोटे-मोटे मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमियों को दूर करने में एक सेतु का कार्य करता है।
संवाद तंत्र: शांति का मुख्य आधार
सेना प्रमुख ने बताया कि ‘डिसइंगेजमेंट’ (सेनाओं के पीछे हटने) की प्रक्रिया ने जमीनी स्तर पर शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। LAC को लेकर भारत और चीन के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, जिसके कारण कई बार स्थानीय स्तर पर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। इन विवादों को सुलझाने के लिए सेना-से-सेना के बीच बातचीत, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर-स्तरीय मुलाकातों का एक सुदृढ़ तंत्र स्थापित है। यह तंत्र न केवल सीमा पर स्थिरता सुनिश्चित करता है, बल्कि गश्त और अन्य स्थानीय गतिविधियों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करता है। दोनों देशों के सैन्य कमांडर एक-दूसरे की चिंताओं को समझने के प्रति पहले से कहीं अधिक तत्परता दिखा रहे हैं।
भारतीय सेना की त्रिसूत्रीय प्राथमिकताएं
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की कार्ययोजना की तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:
- शांति और सद्भाव: LAC पर अमन-चैन बनाए रखना सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- संवाद और समाधान: किसी भी मुद्दे को स्थापित तंत्रों और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हल करना।
- मजबूत तैनाती और तैयारी: किसी भी संभावित खतरे को विफल करने के लिए एक विश्वसनीय और मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए रखना।
इसके अतिरिक्त, सेना उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे (Infrastructure), लॉजिस्टिक्स, आधुनिक निगरानी क्षमताओं और समग्र ऑपरेशनल तैयारियों को निरंतर मजबूत कर रही है। जनरल द्विवेदी का यह कथन कि सेना का नजरिया ‘ताकत के जरिए शांति’ (Peace through Strength) पर आधारित है, भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने और देश की क्षेत्रीय अखंडता व राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।
कूटनीतिक प्रयास और WMCC की भूमिका
सैन्य स्तर के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी निरंतर प्रयास जारी हैं। पिछले महीने बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए ‘कार्य तंत्र’ (WMCC) की 35वीं बैठक आयोजित की गई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बातचीत अत्यंत रचनात्मक और भविष्योन्मुखी रही। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की समीक्षा की और शांति बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इस बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत दिया है। दोनों पक्षों ने सीमा-निर्धारण और सीमा प्रबंधन के साथ-साथ सीमा-पार नदियों से संबंधित तकनीकी मुद्दों पर भी चर्चा की है, जो भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।
एक सुरक्षित और सजग भारत
भारतीय सेना का रुख स्पष्ट है—भारत शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। जहाँ एक ओर बातचीत के द्वार हमेशा खुले हैं, वहीं दूसरी ओर सीमाओं पर अभेद्य सुरक्षा घेरा सुनिश्चित करना सेना की प्रतिबद्धता है। अरुणाचल प्रदेश संबंधी खबरों का खंडन इस बात का प्रमाण है कि सेना जमीनी हकीकत को लेकर पूरी तरह जागरूक है। अंततः, कूटनीति और सैन्य मजबूती का यह दोहरा दृष्टिकोण ही भारत को सीमा पर सुरक्षित रखने और शांतिपूर्ण भविष्य की ओर अग्रसर करने में सक्षम है। राष्ट्र अपने वीर सैनिकों की सजगता पर पूरा भरोसा करता है, जो दुर्गम पहाड़ियों और विषम परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं के प्रहरी बने हुए हैं।