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आईटी शेयरों में बिकवाली के कारण शेयर बाजार में भारी गिरावट। निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला। एक्सेंचर की रिपोर्ट और वैश्विक तनाव का बाजार पर असर।
19 जून 2026 की दोपहर भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी गई, जिसमें आईटी शेयरों ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया। दोपहर 12:15 बजे तक, बीएसई सेंसेक्स 779.94 अंक टूटकर 76,630.04 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी 212.20 अंकों की गिरावट के साथ 23,955.80 पर आ गया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और कमजोर हो गया।
आईटी सेक्टर में मची भगदड़: एक्सेंचर का असर
आज की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी आईटी दिग्गज ‘एक्सेंचर’ का निराशाजनक आउटलुक रहा। एक्सेंचर द्वारा भविष्य की मांग को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की। नतीजतन, निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत का गोता लगा गया और दलाल स्ट्रीट पर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया।
भारतीय आईटी कंपनियों—इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और विप्रो—के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। चूंकि भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में आईटी क्षेत्र का वेटेज काफी अधिक है, इसलिए इस सेक्टर में आई सुनामी ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को नीचे धकेल दिया। विश्लेषकों का मानना है कि एक्सेंचर की टिप्पणी ने उन चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च में रिकवरी की रफ्तार अभी भी सुस्त है।
विदेशी निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली
भारतीय इक्विटी बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रवैया अभी भी सतर्क बना हुआ है। पिछले सत्र में थोड़े समय के लिए खरीदार बनने के बाद, विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को नकद बाजार (cash market) में 1,025.20 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। निरंतर हो रहे FII आउटफ्लो ने बाजार प्रतिभागियों की चिंता बढ़ा दी है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (emerging markets) में अपने जोखिम को फिर से तौल रहे हैं।
इसके साथ ही, बाजार में ‘मुनाफावसूली’ (profit booking) का दौर भी देखा गया। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में बेंचमार्क इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत तक चढ़ चुके थे। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर रिस्क सेंटिमेंट के चलते बाजार ने अच्छी रैली दिखाई थी, लेकिन आईटी शेयरों में बिकवाली के दबाव ने निवेशकों को मुनाफा सुरक्षित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
‘इंडिया VIX’ ने बढ़ाई घबराहट: बाजार में बढ़ा डर
निवेशकों की सतर्कता का अंदाजा ‘इंडिया VIX’ (India VIX) के उछाल से लगाया जा सकता है। बाजार का ‘फियर गेज’ माने जाने वाले इस वोलेटिलिटी इंडेक्स में करीब 6 प्रतिशत का उछाल आया और यह 13.37 के स्तर पर पहुंच गया। बढ़ता हुआ VIX यह संकेत देता है कि आने वाले समय में बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव (swings) की उम्मीद है। जब अनिश्चितता का माहौल बढ़ता है, तो निवेशक आमतौर पर जोखिम वाली संपत्तियों (risky assets) से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं, जिसका सीधा असर इंडेक्स पर दिखता है।
वैश्विक बाजार का कमजोर रुख और भू-राजनीतिक तनाव
घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों से भी कोई सहारा नहीं मिला। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स (US stock futures) कमजोर कारोबार कर रहे थे, जिसमें नैस्डैक (Nasdaq) फ्यूचर्स की अगुवाई में गिरावट देखी गई। वैश्विक तकनीक शेयरों में कमजोरी और आर्थिक विकास को लेकर चिंताओं के चलते निवेशकों ने ‘रिस्क-ऑफ’ (risk-off) दृष्टिकोण अपनाया, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। इसके अलावा, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की धारणा को और अधिक ठंडा कर दिया है।
निष्कर्ष: आगे की राह
फिलहाल बाजार का निफ्टी 24,000 के स्तर के नीचे ट्रेड करना निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितताएं कम नहीं होतीं और आईटी सेक्टर में कोई ठोस सुधार नहीं दिखता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे किसी भी निवेश से पहले बाजार की वोलेटिलिटी को ध्यान में रखें। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वैश्विक दबाव के कारण बाजार को और अधिक उतार-चढ़ाव झेलने पड़ सकते हैं।