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गायत्री जयंती 2026 कब मनाई जाएगी? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और गायत्री मंत्र जाप का महत्व।
हिंदू धर्म में गायत्री जयंती का अत्यंत पावन और विशेष महत्व है। यह पर्व मुख्य रूप से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जिसे निर्जला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। कुछ परंपराओं में इसे श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन भी मनाने का विधान है। मां गायत्री को वेदमाता, देवमाता और विश्वमाता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें त्रिमूर्ति का स्वरूप माना गया है—वे देवी सरस्वती, देवी पार्वती और देवी लक्ष्मी का सम्मिलित अवतार हैं। साथ ही, मां गायत्री को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की भी आराध्य देवी माना जाता है। इस वर्ष गायत्री जयंती 25 जून 2026 को मनाई जाएगी।
गायत्री जयंती 2026: शुभ तिथि और मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी पूजा की पूर्ण सिद्धि के लिए सही समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में गायत्री जयंती के दिन पूजा के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त सुबह 05:25 से 07:10 बजे तक है। इसके पश्चात दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10:39 से दोपहर 02:09 बजे तक रहेगा। भक्तों के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय स्नान और शुद्धिकरण के लिए सुबह 04:05 से 04:45 बजे तक निर्धारित है। इन मुहूर्तों में की गई पूजा और साधना का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
विधि-विधान: मां गायत्री की पूजा कैसे करें?
गायत्री जयंती का पर्व मन और शरीर की शुद्धि का संदेश देता है। इस दिन की पूजा विधि निम्नलिखित है:
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या गंगा जल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए। यह स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन में भक्ति का संचार भी करता है।
- व्रत का संकल्प: स्नान के पश्चात पूजा स्थल पर बैठकर व्रत और मां की पूजा का संकल्प लें।
- विधि-विधान से आराधना: मां गायत्री की मूर्ति या चित्र के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें। माता को फल, फूल, माला और नैवेद्य अर्पित करें।
- मंत्र जप और पाठ: पूजा के दौरान ‘गायत्री मंत्र’ का निरंतर जाप करें। इसके साथ ही ‘गायत्री चालीसा’ का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
- स्तोत्र पाठ: आध्यात्मिक उन्नति के लिए इस दिन ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है।
- आरती और दान: पूजा के अंत में माता की भव्य आरती करें। गायत्री जयंती पर अन्न, गुड़, वस्त्र और गेहूं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। दान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि कुंडली में ग्रहों के दोष भी शांत होते हैं।
गायत्री मंत्र: आत्मिक शांति का मूल आधार
गायत्री जयंती का दिन ‘गायत्री मंत्र’ की शक्ति को समर्पित है। इस दिन कम से कम 108 बार इस महामंत्र का जाप करना अनिवार्य माना गया है। कहा जाता है कि इस मंत्र में इतनी ऊर्जा है कि यह जीवन की सभी जटिल परेशानियों का अंत करने में सक्षम है।
मंत्र:
“ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥”
इस मंत्र का अर्थ है: “उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।” यह मंत्र हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग दिखाता है।
गायत्री जयंती का आध्यात्मिक महत्व
गायत्री जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के आत्मनिरीक्षण और सुधार का पर्व है। जो व्यक्ति सच्चे मन और निष्काम भाव से मां गायत्री की उपासना करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। यह व्रत और साधना करने वाले साधक को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास होता है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
गायत्री जयंती पर किए गए दान-पुण्य के कार्य मनुष्य को संकुचित दायरे से बाहर निकालकर व्यापक मानवता की ओर ले जाते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम स्वयं भी उस परब्रह्म का अंश हैं और निरंतर साधना के द्वारा उस परम सत्य को प्राप्त कर सकते हैं। इस पावन अवसर पर मां गायत्री की भक्ति हमें सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।