महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव की 12 सीटों पर मतदान जारी। महायुति और एमवीए के बीच मुकाबला, पांच सीटें पहले ही निर्विरोध।
महाराष्ट्र में स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्रों से विधान परिषद की 12 सीटों के लिए गुरुवार सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हुआ, जो दोपहर 4 बजे तक जारी रहा। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल 17 सीटों पर चुनाव की अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन ने पहले ही पांच सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है, जिसके कारण अब 12 सीटों पर ही चुनावी मुकाबला हो रहा है। महायुति, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं, अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है, जबकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की जद्दोजहद में लगी है।
महायुति ने पहले ही भाजपा के अरुण लखानी (वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली), एनसीपी के विक्रम काकडे (पुणे) और अनिकेत तटकरे (रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग), तथा शिवसेना के रवींद्र फाटक (ठाणे) और दुष्यंत चतुर्वेदी (यवतमाल) को निर्विरोध जिताकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। इन शुरुआती जीत ने गठबंधन के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब उनका ध्यान शेष 12 सीटों पर केंद्रित है।
प्रमुख चुनावी मुकाबले और गठबंधन के भीतर की चुनौतियां
सतारा-सांगली निर्वाचन क्षेत्र को इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला माना जा रहा है। यहाँ भाजपा के धैर्यशील कदम और विपक्षी एनसीपी (एसपी) के अभयसिंह जगताप के बीच सीधा संघर्ष है। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कुछ असंतोष भी देखने को मिला। शिवसेना नेता और मंत्री शंभूराज देसाई ने गठबंधन समन्वय बैठकों से दूरी बनाकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन बाद में शिवसेना के बागी तानाजीराव पाटिल के मैदान से हटने के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई और मुकाबला सीधा हो गया।
इसके अलावा, नासिक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण रही, जहां पार्टी नेता गोकुल गीते ने महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे (शिवसेना) के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया था। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय होना पड़ा। गिरीश महाजन और उदय सामंत जैसे नेताओं की मध्यस्थता के बाद, गीते ने अपना प्रचार रोक दिया, हालांकि नामांकन वापसी की समयसीमा समाप्त होने के कारण उनका नाम मतपत्र पर बना रहा। अमरावती में भी कांग्रेस के हर्षजीत देशमुख के स्वास्थ्य कारणों से नाम वापस लेने पर राजनीति गरमाई रही और विपक्षी दलों ने इसे ‘प्रबंधित’ चुनाव करार दिया।
विपक्ष के आरोप और जमीनी हकीकत
विपक्षी दल महा विकास अघाड़ी ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने ‘धन बल’ और राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल करके कई निर्वाचन क्षेत्रों में उनके उम्मीदवारों को मैदान से हटने के लिए मजबूर किया है। उदाहरण के लिए, कोंकण में शिवसेना (यूबीटी) के बाल माने और पुणे में एनसीपी (एसपी) के श्रीकांत पाटिल की उम्मीदवारी वापसी ने महायुति के निर्विरोध जीत के दावों को बल दिया। इन आरोपों को महायुति के नेताओं ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक सूझबूझ और गठबंधन की मजबूती करार दिया है।
नांदेड़ और उस्मानाबाद-लातूर-बीड़ जैसे क्षेत्रों में भी मतदाताओं की बड़ी संख्या अपने मताधिकार का प्रयोग कर रही है। उस्मानाबाद-लातूर-बीड़ सीट पर भाजपा के बसवराज पाटिल मुरमकर और कांग्रेस के महेश देशमुख के बीच कड़ी टक्कर है। कुल मिलाकर, यह चुनाव महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति का भविष्य तय करने वाला है। इन चुनावों के नतीजे न केवल विधान परिषद में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेंगे, बल्कि आने वाले समय में राज्य की गठबंधन राजनीति की स्थिरता पर भी अपनी गहरी छाप छोड़ेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या महायुति अपना वर्चस्व बरकरार रख पाती है या एमवीए कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होती है।