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इंफोसिस (Infosys) ने मार्च तिमाही के लिए अपने कर्मचारियों के वेरिएबल पे (Variable Pay) में कटौती की है। जानें किस ग्रेड को कितना मिला बोनस और आईटी सेक्टर पर क्यों मंडरा रहा है AI का खतरा।
भारतीय आईटी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) के कर्मचारियों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। एक मीडिया रिपोर्ट (मनीकंट्रोल) के अनुसार, कंपनी ने मार्च तिमाही (Q4) के लिए अपने कर्मचारियों के परफॉर्मेंस बोनस यानी वेरिएबल पे (Variable Pay) के भुगतान में बड़ी कटौती कर दी है। यह फैसला कंपनी की पिछली तिमाहियों की नीतियों के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि इससे ठीक पिछली तिमाही (दिसंबर तिमाही) में इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को पिछले तीन वर्षों में सबसे मजबूत और रिकॉर्ड वेरिएबल पे वितरित किया था।
85 फीसदी से घटकर 70 फीसदी पर आया बोनस
मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की रिपोर्ट के मुताबिक, इंफोसिस ने मार्च तिमाही के लिए औसतन लगभग 70 प्रतिशत वेरिएबल पे देने की घोषणा की है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में दिए गए 85 प्रतिशत के बोनस भुगतान से काफी कम है। दिसंबर तिमाही का 85% का भुगतान पिछले तीन वर्षों में कंपनी का सबसे बेहतरीन वेरिएबल पे परफॉर्मेंस था, लेकिन चौथी तिमाही में कंपनी के इस फैसले ने कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
विभिन्न कर्मचारी ग्रेड्स (PL Bands) के लिए अलग-अलग भुगतान ढांचा
रिपोर्ट के अनुसार, आंतरिक पेआउट मैट्रिक्स की समीक्षा से पता चला है कि इस बार इंफोसिस में वेरिएबल पे का वितरण सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नहीं रहा है। कंपनी के भीतर इस्तेमाल होने वाले विभिन्न ‘पर्सनल लेवल’ (PL) बैंड्स, जो कर्मचारियों के परफॉर्मेंस ग्रेड और डिलीवरी सेगमेंट को तय करते हैं, के आधार पर बोनस इस प्रकार तय किया गया है:
- PL4 ग्रेड (Personal Level 4): इस बैंड के कर्मचारियों को उनके बिजनेस यूनिट के आधार पर 67 प्रतिशत से 82 प्रतिशत के बीच वेरिएबल पे मिला है।
- PL5 ग्रेड (Personal Level 5): इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए बोनस भुगतान का दायरा 65 प्रतिशत से 78 प्रतिशत के बीच तय किया गया है।
- PL6 ग्रेड (Personal Level 6): इस बैंड के कर्मचारियों को सबसे कम यानी 63 प्रतिशत से 77 प्रतिशत के बीच ही बोनस मिल पाया है।
- ये पीएल (PL) बैंड्स इंफोसिस द्वारा मूल्यांकन चक्र (Appraisal Cycle) के दौरान कर्मचारियों के प्रदर्शन को आंकने और वेरिएबल पे का आवंटन तय करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आंतरिक ग्रेडिंग सिस्टम हैं।
आईटी शेयरों पर बाजार का दबाव और इंफोसिस में 23% की गिरावट
पिछले कुछ महीनों में भारतीय आईटी सेक्टर और उनके शेयरों पर चौतरफा दबाव देखा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजार में मंदी की आशंका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता प्रभाव है। इस बाजार दबाव का असर कंपनियों के वित्तीय परिणामों और स्टॉक प्रदर्शन पर साफ दिख रहा है। पिछले छह महीनों के आंकड़ों को देखें तो अकेले इंफोसिस के शेयरों में 23 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिसने निवेशकों के साथ-साथ बाजार विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है।
क्या पारंपरिक आईटी कंपनियों को निगल जाएगा AI?
आईटी उद्योग इस समय एक बड़े तकनीकी बदलाव और इंफ्लेक्शन पॉइंट (Inflection Point) से गुजर रहा है। ओपनएआई, गूगल और अन्य तकनीकी दिग्गजों द्वारा विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक एआई टूल्स और जनरेटिव एआई मॉडल्स के उभार ने निवेशकों के मन में एक बड़ा डर पैदा कर दिया है।
बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों को डर है कि भारतीय आईटी कंपनियों का पारंपरिक ‘सास-आधारित’ (SaaS-based) और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट बिजनेस मॉडल अब खतरे में है। आशंका यह जताई जा रही है कि एक बार जब पूरी तरह से एआई-संचालित टूल्स का उपयोग शुरू हो जाएगा, तो ये एआई मॉडल्स पारंपरिक कोडिंग और सॉफ्टवेयर डिलीवरी का काम खुद कर लेंगे। ऐसे में इन आईटी दिग्गजों को नए बिजनेस और रेवेन्यू (राजस्व) के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है, जिससे इनकी विकास दर और कर्मचारियों के रोजगार दोनों पर परमानेंट असर पड़ सकता है। इसी भविष्य के वित्तीय जोखिम को संतुलित करने के लिए कंपनियां अब अपने खर्चों और बोनस स्ट्रक्चर को कड़ा कर रही हैं।