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भारतीय शेयर बाज़ार में 29 मई को सपाट शुरुआत की उम्मीद। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव घटने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का बाज़ार पर असर।
भारतीय शेयर बाज़ार के लिए शुक्रवार, 29 मई का दिन एक मिली-जुली और सतर्क शुरुआत वाला रहने की संभावना है। जहाँ एक ओर वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव कम होने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, वहीं घरेलू बाज़ार में निवेशकों का रुख थोड़ा संभला हुआ है। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारतीय बाज़ार की शुरुआत सपाट या मामूली उतार-चढ़ाव के साथ हो सकती है। सुबह 7:37 बजे तक, गिफ्ट निफ्टी 11.5 अंक या 0.05% की हल्की बढ़त के साथ 23,885 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो कि एक सतर्क रुख को दर्शाता है।
ईरान-अमेरिका मोर्चे पर बड़ी राहत
पिछले कुछ दिनों से पूरी दुनिया की निगाहें मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव पर टिकी थीं, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खमेनेई की एक सैन्य अभियान में मृत्यु के बाद चरम पर पहुँच गया था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा संकट मंडरा रहा था। हालांकि, अब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की खबरें सामने आई हैं। दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम (ceasefire) को 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति बनी है, जो वैश्विक बाज़ार के लिए एक बड़ी राहत है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
ईरान और अमेरिका के बीच बनी इस नई सहमति का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाज़ार पर पड़ा है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से गिरी हैं और यह 90 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे आ गई हैं। तनाव कम होने का सबसे सकारात्मक संकेत ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की संभावना से मिला है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी, जिससे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
बाज़ार के लिए इसका क्या मतलब है?
निवेशकों के लिए तेल की कीमतों में यह गिरावट एक बहुत अच्छा संकेत है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी का सीधा लाभ आर्थिक घाटे को कम करने और महंगाई को नियंत्रित करने में मिलता है। हालाँकि, बाज़ार अभी भी सतर्क है क्योंकि भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर अक्सर रातों-रात बदल सकता है।
शुक्रवार के सत्र के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की नीति अपनानी चाहिए। निफ्टी के स्तरों को देखें तो 23,800-23,900 का दायरा काफी महत्वपूर्ण बना हुआ है। यदि बाज़ार इस स्तर को बनाए रखता है, तो दिन के उत्तरार्ध में खरीदारी की दिलचस्पी देखी जा सकती है।
निवेशकों के लिए आज की रणनीति
आज के सत्र में निवेशकों को उन क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए जो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से लाभान्वित होते हैं। इनमें पेंट कंपनियाँ, टायर निर्माता और तेल विपणन कंपनियाँ (OMCs) शामिल हैं। दूसरी ओर, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी हलचल देखने को मिल सकती है, क्योंकि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार हुआ है।
कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका के बीच यह ‘पीस ब्रेकथ्रू’ वैश्विक स्तर पर आर्थिक तनाव को कम करने वाला है। हालांकि, बाज़ार के लिए यह दिन उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। किसी भी बड़े निर्णय को लेने से पहले वैश्विक बाजारों की चाल और संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) के रुझान पर नज़र रखना अनिवार्य है।
आज के दिन बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना कम है, लेकिन शांति से काम लेने वाले निवेशक अच्छे अवसरों की तलाश कर सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बाजार दिन भर में इस सकारात्मक खबर के दम पर अपनी बढ़त बनाए रख पाता है या मुनाफावसूली का शिकार होता है।