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31 मई को अधिक मास पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ संयोग। जानें आर्थिक तंगी दूर करने और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के अचूक उपाय।
हिंदू पंचांग में ‘अधिक मास’ को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष 31 मई को पड़ने वाली अधिक मास पूर्णिमा एक अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोग लेकर आ रही है। पूर्णिमा का दिन वैसे भी चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा का प्रतीक होता है, लेकिन अधिक मास में पड़ने के कारण इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस विशेष दिन पर किया गया दान, जप और तप अक्षय फल प्रदान करता है। यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज या पैसों की समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह पूर्णिमा आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
अधिक मास पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
अधिक मास, जिसे ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस मास में की गई पूजा-अर्चना सीधे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है, जिससे मन की एकाग्रता बढ़ती है। 31 मई को पड़ने वाली यह पूर्णिमा न केवल आध्यात्मिक शांति के लिए, बल्कि भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए भी एक उत्तम अवसर है। इस दिन ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, वह धन प्राप्ति के योग को बलवती बना रही है।
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए विशेष महाउपाय
यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में लक्ष्मी का स्थायी वास हो और धन के रास्ते में आने वाली बाधाएं समाप्त हों, तो 31 मई को नीचे दिए गए उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ करें:
- माता लक्ष्मी का अभिषेक: पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें या केवल इत्र अर्पित करें। साथ ही ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः’ का 108 बार जप करें।
- चांदी के सिक्के का प्रयोग: इस दिन तिजोरी में एक नया चांदी का सिक्का रखें जिस पर लक्ष्मी-गणेश का अंकन हो। इसे लाल रेशमी कपड़े में बांधकर रखें। यह उपाय व्यापार और नौकरी में आ रही मंदी को दूर करने में सहायक माना जाता है।
- पीपल की पूजा: पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि पीपल में साक्षात विष्णु जी का वास होता है, और शनिवार के दिन पूर्णिमा होने पर यह उपाय विशेष प्रभावी होता है।
- दान का महत्व: इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान किसी जरूरतमंद को करें। दान से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक शांति के साथ-साथ धन का प्रवाह सुगम होता है।
दुर्लभ संयोग: क्या है खास?
31 मई को पड़ने वाली यह पूर्णिमा कई मायनों में अनूठी है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चंद्रमा अपनी उच्च राशि में है और गुरु का प्रभाव भी शुभ है। यह संयोग उन लोगों के लिए बहुत लाभकारी है जो संपत्ति खरीदना चाहते हैं, नए व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं या फंसा हुआ धन वापस पाना चाहते हैं। यह दिन ‘शुक्ल योग’ का निर्माण कर रहा है, जो कार्यों में सफलता और मान-सम्मान की वृद्धि का प्रतीक है।
ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
अधिक मास पूर्णिमा के दिन केवल उपाय ही काफी नहीं हैं, बल्कि आपके आचरण और मन की शुद्धता भी बहुत मायने रखती है। इस दिन सात्विक भोजन करें, क्रोध से बचें और वाणी में मधुरता लाएं। घर की साफ-सफाई विशेष रूप से करें, क्योंकि लक्ष्मी जी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं और सायंकाल में मुख्य द्वार को अच्छी तरह रोशन रखें।
अधिक मास पूर्णिमा 31 मई का यह अवसर हमें यह संदेश देता है कि ईश्वर की आराधना और सही कर्मों के माध्यम से हम अपने जीवन की दरिद्रता को सुख-समृद्धि में बदल सकते हैं। यह दिन केवल धन मांगने के लिए नहीं, बल्कि उन सकारात्मक ऊर्जाओं को अपने भीतर उतारने का है जो हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने का साहस दें। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये उपाय निश्चित रूप से आपके जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लाएंगे। अपनी आस्था को दृढ़ रखें और पूर्ण समर्पण के साथ इस पूर्णिमा का लाभ उठाएं।