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पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा में दोनों देशों के बीच ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ का ऐलान हुआ। स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष क्षेत्र समेत 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत-नॉर्वे संबंध: ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के नए युग की शुरुआत
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की विदेश यात्रा के चौथे चरण में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो का दौरा दोनों देशों के राजनयिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधान मंत्री जोनास गहर स्टोर (Jonas Gahr Støre) के बीच अत्यंत फलदायी और व्यापक चर्चा हुई। इस बैठक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण परिणाम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ (Green Strategic Partnership) के रूप में अपग्रेड करना रहा। यह नया कदम न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक जलवायु संकट से निपटने के साझा प्रयासों को भी एक नई दिशा देगा।
हरित रणनीतिक साझेदारी और सतत विकास पर जोर
प्रधान मंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बैठक की सफलता को साझा किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को जिस ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ में बदला है, वह भविष्य के विकास का खाका तैयार करेगी। इस साझेदारी के तहत मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), सतत विकास (Sustainable Growth), ‘ब्लू इकोनॉमी’ (समुद्री अर्थव्यवस्था) और हरित नौवहन (Green Shipping) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया जाएगा। यह समझौता इस बात का प्रतीक है कि भारत की विनिर्माण क्षमता और नॉर्वे की अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक स्तर पर एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं। दोनों देश सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाने पर सहमत हुए हैं।
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में नॉर्वे का स्वागत
Jeg hadde fruktbare samtaler med statsminister Jonas Gahr Støre i Oslo. Et av de viktigste høydepunktene var oppgraderingen av vårt bilaterale partnerskap til et grønt strategisk partnerskap, som vil styrke samarbeidet innen ren energi, bærekraftig vekst, den blå økonomien og… pic.twitter.com/MNslB1hMmi
— Narendra Modi (@narendramodi) May 19, 2026
इस रणनीतिक बैठक का एक और बड़ा और रणनीतिक परिणाम नॉर्वे का ‘इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) में शामिल होना रहा। प्रधान मंत्री मोदी ने नॉर्वे के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया और इसे एक अत्यंत संतोषजनक कदम बताया। नॉर्वे का इस पहल से जुड़ना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, दोनों देशों ने समुद्री सहयोग को और गहरा करने के लिए ‘नॉर-शिपिंग 2027’ (Nor-Shipping 2027) में भारत की भागीदारी की घोषणा की है, जहां एक समर्पित ‘इंडिया पवेलियन’ स्थापित किया जाएगा। इससे जहाज निर्माण, हरित जहाज प्रौद्योगिकियों और आधुनिक बंदरगाह बुनियादी ढांचे में व्यापारिक सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।
तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक छलांग लगाई है। दोनों पक्षों ने ‘भारत-नॉर्वे डिजिटल विकास साझेदारी’ (India-Norway Digital Development Partnership) की शुरुआत की। यह साझेदारी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), डिजिटल पब्लिक गुड्स और ओपन डिजिटल इकोसिस्टम के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगी। यह कदम भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन को मजबूत करने के साथ-साथ नॉर्वे के सहयोग से ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) में भी डिजिटल परिवर्तन को गति देगा।
इसके साथ ही, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण अन्वेषण और उपयोग के लिए दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच संस्थागत सहयोग को बढ़ाया जाएगा और इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
शोध, शिक्षा और कौशल विकास पर गहन चर्चा
भविष्य की पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए, दोनों प्रधान मंत्रियों ने केवल उद्योग और तकनीक तक ही अपने सहयोग को सीमित नहीं रखा। बैठक के दौरान इस बात पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ कि कैसे दोनों देश नवाचार (Innovation), शोध (Research), शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) और कौशल विकास (Skills Development) में अपने संबंधों को गहरा कर सकते हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के युवाओं के लिए रोजगार, उच्च शिक्षा और तकनीकी आदान-प्रदान के नए और सुनहरे अवसर पैदा होंगे।
साझा संयुक्त बयान और 12 महत्वपूर्ण समझौते
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक व्यापक विस्तार देते हुए 12 महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का दायरा जलवायु कार्रवाई से लेकर प्रौद्योगिकी, समुद्री और वैज्ञानिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त बयान भी अपनाया गया, जो यह दर्शाता है कि भारत और नॉर्वे वैश्विक कल्याण और सतत आर्थिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का महत्वपूर्ण पड़ाव
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यह नॉर्वे यात्रा उनके पांच देशों के व्यापक विदेश दौरे का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा थी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड और स्वीडन की सफल यात्राओं के बाद ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी का यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति को एक नई ऊंचाई पर ले गया है। नॉर्वे के साथ हुई यह ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ न केवल भारत को अपनी स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल महाशक्ति के रूप में भारत की छवि को और मजबूत करेगी।