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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई में हो ची मिन्ह को श्रद्धांजलि दी। अपनी वियतनाम और दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान वह रक्षा विनिर्माण और ब्रह्मोस सौदे पर चर्चा करेंगे।
भारत-वियतनाम रणनीतिक संबंध: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई में हो ची मिन्ह को दी श्रद्धांजलि
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी दो दिवसीय आधिकारिक वियतनाम यात्रा के दौरान हनोई स्थित ‘हो ची मिन्ह समाधि स्थल’ (Ho Chi Minh Mausoleum) जाकर वियतनाम के राष्ट्रपिता हो ची मिन्ह को उनकी 136वीं जयंती के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजनाथ सिंह ने समाधि स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस गरिमामयी समारोह के दौरान समाधि परिसर में 969वीं रेजिमेंट के कमांडर ने रक्षा मंत्री का स्वागत किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस क्षण को साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “राष्ट्रीय मुक्ति और वैश्विक एकजुटता के प्रति हो ची मिन्ह का दृष्टिकोण, नेतृत्व और स्थायी प्रतिबद्धता आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। भारत-वियतनाम मित्रता साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर टिकी हुई है।” रक्षा मंत्री की यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय रक्षा और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंडो-पैसिफिक में रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प
Có cuộc gặp song phương hiệu quả với Đại tướng Phan Văn Giang, Bộ trưởng Quốc phòng Việt Nam. Hai bên đã xem xét mối quan hệ đối tác quốc phòng ngày càng phát triển giữa Ấn Độ và Việt Nam và thảo luận các cách thức để tăng cường hơn nữa hợp tác trong… pic.twitter.com/byFhvHMJ2D
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) May 19, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को हनोई पहुंचे, जो उनके दो देशों के विदेश दौरे का पहला पड़ाव है। हनोई के हवाई अड्डे पर वियतनाम पीपुल्स आर्मी (VPA) के उप मुख्य जनरल स्टाफ, वियतनाम में भारत के राजदूत और भारतीय दूतावास के रक्षा अताशे (Defence Attache) ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
यह यात्रा हाल ही में वियतनाम के शीर्ष नेता तो लाम (To Lam) की नई दिल्ली की आधिकारिक राज्य यात्रा के ठीक बाद हो रही है, जो दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की गतिशीलता को दर्शाती है। राजनाथ सिंह की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाना है।
ब्रह्मोस मिसाइल सौदा और रक्षा विनिर्माण पर चर्चा
इस द्विपक्षीय वार्ता का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बिंदु भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली (BrahMos Supersonic Cruise Missile System) की संभावित आपूर्ति होने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच चल रही रक्षा वार्ताओं में इस मिसाइल सौदे की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी, जो लंबे समय से चर्चा के एजेंडे में शामिल है।
अपनी इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने वियतनामी समकक्ष के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य ध्यान रक्षा सहयोग, सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। दोनों देश रक्षा उद्योगों में आत्मनिर्भरता और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
यात्रा का अगला पड़ाव: दक्षिण कोरिया दौरा और व्यापारिक सहयोग
वियतनाम में अपनी बैठकों को पूरा करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने इस दो दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में रिपब्लिक ऑफ कोरिया (दक्षिण कोरिया) के लिए रवाना होंगे। दक्षिण कोरिया में रक्षा विनिर्माण, सैन्य उद्योग सहयोग और अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी (Technology Cooperation) के हस्तांतरण जैसे विषय एजेंडे में शीर्ष पर रहेंगे।
दक्षिण कोरिया में राजनाथ सिंह वहां के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक (Ahn Gyu-back) के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के रक्षा संबंधों की समीक्षा की जाएगी और रणनीतिक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए नई पहलों की खोज की जाएगी। इसके अलावा, वह रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (DAPA) के मंत्री ली योंग-चिओन (Lee Yong-cheol) से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल (India-Korea Business Roundtable) बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच निवेश को आकर्षित करना है।
भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन
रक्षा मंत्री की इस दक्षिण कोरिया यात्रा का एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक क्षण 21 मई को आएगा, जब वह दक्षिण कोरिया के देशभक्त और पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल (Kwon Oh-eul) के साथ मिलकर ‘भारतीय युद्ध स्मारक’ (Indian War Memorial) का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे। यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय चिकित्सा इकाई और शांति सैनिकों के अमूल्य योगदान और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। रक्षा मंत्री का यह दो देशों का दौरा न केवल दक्षिण-पूर्वी एशिया और पूर्वी एशिया में भारत के रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगा।