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अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्वदेशी जनजातीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा और ILP प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक अलग विभाग स्थापित करने की घोषणा की है।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा और स्वदेशी जनजातीय समुदायों के अधिकारों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की है। राज्य सरकार अब ‘इनर लाइन परमिट’ (ILP) प्रणाली के प्रभावी प्रवर्तन और निगरानी के लिए एक अलग विभाग स्थापित करेगी। यह निर्णय विभिन्न छात्र संगठनों, सामुदायिक समूहों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई सात घंटे की गहन परामर्श बैठक के बाद लिया गया। यह बैठक ‘अरुणाचल प्रदेश एसटी बचाओ आंदोलन समिति’ (APSTBAC) द्वारा उठाई गई मांगों और राज्य की भविष्य की सुरक्षा पर केंद्रित थी।
स्वदेशी अधिकारों और ILP के लिए नई कार्ययोजना
मुख्यमंत्री खांडू ने बताया कि राज्य सरकार ने APSTBAC की चार प्रमुख मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इन मांगों में स्वदेशी अधिकारों का सख्त संरक्षण, अवैध प्रवासियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, ILP प्रणाली का प्रभावी कार्यान्वयन और गैर-जनजातीय समूहों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का विरोध शामिल है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की जनजातीय पहचान और सुरक्षा के लिए अब तक की सबसे विस्तृत चर्चाओं में से एक बताया। भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए, उन्होंने अरुणाचल इंडीजीनस ट्राइब्स फोरम (AITF), ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU), APSTBAC और कानूनी विशेषज्ञों के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को 29 मई की बैठक के लिए आमंत्रित किया है। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार एक पारदर्शी रोडमैप तैयार करेगी।
अवैध धार्मिक ढांचों और जनसांख्यिकीय सुरक्षा पर सख्त रुख
राज्य में अवैध धार्मिक संरचनाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में अनधिकृत मस्जिदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मुख्य सचिव को ऐसी संरचनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि उन पर उचित कार्रवाई की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अरुणाचल प्रदेश इंडीजीनस यूथ ऑर्गनाइजेशन’ (APIYO) द्वारा इटाानगर में बुलाई गई हालिया बंद की चिंताएं भी जायज थीं, लेकिन सरकार पहले से ही इस मामले पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
राष्ट्रीय संदर्भ और जनसांख्यिकीय असंतुलन
मुख्यमंत्री खांडू ने इस बात पर जोर दिया कि अवैध आव्रजन, जनसांख्यिकीय असंतुलन और स्वदेशी संस्कृति के सामने मौजूद चुनौतियां केवल अरुणाचल प्रदेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक राष्ट्रीय मुद्दा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने भी यह स्वीकार किया है कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन कानून-व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गंभीर कारक हैं। इस दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस अधिकारी और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह समिति देश भर में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की निगरानी करेगी।
बाहरी श्रम पर निर्भरता कम करने और विकास पर जोर
राज्य की जनजातीय विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ, मुख्यमंत्री ने स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य के युवा कुशल होंगे, तो बाहरी श्रमिकों पर निर्भरता अपने आप कम हो जाएगी। यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना को भी संतुलित बनाए रखने में सहायक होगी।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू का यह कदम अरुणाचल प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अलग ILP विभाग का गठन और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सरकार की यह सख्त नीति राज्य की स्वदेशी आबादी के हितों को सुरक्षित करने में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलना ही अरुणाचल प्रदेश के समृद्ध भविष्य की एकमात्र कुंजी है। 29 मई को होने वाली अगली बैठक और उसके बाद बनने वाली नीति से राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में एक नया और प्रभावी अध्याय जुड़ने की उम्मीद है।