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ATF Price: 1 मई 2026 से अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल के दाम $1,511.86 हो गए हैं। घरेलू उड़ानों, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं कर सरकार ने आम जनता को राहत दी है।
1 मई 2026 को तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बदलाव किया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल के दाम 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू एयरलाइंस और आम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए बढ़ा बोझ: 5.33% की वृद्धि
राज्य द्वारा संचालित तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमतों में $76.55 प्रति किलोलीटर की बढ़ोतरी की है। इस 5.33 प्रतिशत की वृद्धि के बाद दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमत $1,511.86 प्रति किलोलीटर हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब वैश्विक ऊर्जा लागतों में वृद्धि का बोझ अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पर डाला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जो अस्थिरता आई है, यह उसी का परिणाम है।
घरेलू एयरलाइंस को मिली बड़ी राहत: दाम स्थिर
एक ओर जहाँ अंतरराष्ट्रीय दरों में वृद्धि हुई है, वहीं केंद्र सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू विमानन क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान की है। घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने एक बयान में स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू दरों को स्थिर रखा गया है ताकि स्थानीय एयरलाइंस और हवाई यात्रियों को महंगाई से बचाया जा सके। गौरतलब है कि अप्रैल की शुरुआत में घरेलू एटीएफ की कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई थी, जिसके बाद अब स्थिरता का फैसला लिया गया है।
पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर कोई असर नहीं
आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि पेट्रोल, डीजल और 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें यथावत बनी हुई हैं। इंडियन ऑयल के अनुसार, देश के लगभग 90 प्रतिशत ईंधन उपभोक्ता इन उत्पादों का उपयोग करते हैं, जिन्हें वैश्विक बाजार की उथल-पुथल से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले केरोसिन के दामों में भी कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
सरकार की ‘कैलिब्रेटेड’ रणनीति: संतुलित दृष्टिकोण
तेल कंपनियों ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण (Calibrated Approach) अपनाया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल पेट्रोलियम उत्पादों में से 80 प्रतिशत उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल 16 प्रतिशत औद्योगिक ईंधन (जैसे कमर्शियल गैस और अंतरराष्ट्रीय एटीएफ) के दाम बढ़ाए गए हैं, जबकि 4 प्रतिशत उत्पादों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सरकार की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ घरेलू अर्थव्यवस्था को महंगाई के झटकों से बचाना है।