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भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखी गई। कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जाने, रुपये के 94.5 के पार गिरने और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निवेशकों ने भारी बिकवाली की।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान के साथ खुले और देखते ही देखते बिकवाली का दबाव गहरा गया। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। सुबह 9:53 बजे तक, BSE सेंसेक्स 492 अंक गिरकर 77,351.53 पर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE निफ्टी 153 अंकों की गिरावट के साथ 24,172.72 के स्तर पर आ गया।
बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
आज की गिरावट केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
1. कच्चे तेल का $100 के पार जाना
अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को हुई गोलीबारी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में महंगा तेल देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति (Inflation) के लिए बड़ा खतरा है।
2. अमेरिका-ईरान संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव
होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान से अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार करने का आह्वान किया है और कहा है कि वाशिंगटन “तनाव नहीं चाहता”, लेकिन सैन्य संघर्ष और राजनयिक संदेशों के बीच के विरोधाभास ने निवेशकों को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
3. रुपया 94.5 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार गिरावट जारी है। आज शुरुआती कारोबार में रुपया 94.22 के मुकाबले गिरकर 94.55 के स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है और विदेशी निवेशकों के विश्वास को कम करता है।
4. विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। गुरुवार को FIIs ने 340.89 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। वैश्विक अस्थिरता के बीच विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) के बजाय सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
5. बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में कमजोरी
बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा हाथ वित्तीय स्टॉक्स (Financials) का रहा। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में लगभग 1% की गिरावट देखी गई। निजी और सरकारी दोनों ही बैंकों में बिकवाली का दबाव रहा, जिससे बाजार को ऊपर ले जाने वाला कोई मजबूत सहारा नहीं मिल सका।
सेक्टरवार प्रदर्शन: IT और हेल्थकेयर ने संभाला मोर्चा
जहां एक ओर ऑयल एंड गैस, मेटल, रियल्टी और बैंकिंग इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट रही, वहीं IT सेक्टर ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। निर्यात पर केंद्रित होने के कारण आईटी इंडेक्स में 0.6% की बढ़त देखी गई। इसके अलावा, हेल्थकेयर सेक्टर में भी खरीदारी रही, जो यह दर्शाता है कि निवेशक अब सुरक्षित और ‘डिफेंसिव’ स्टॉक्स की ओर जा रहे हैं।
ब्रॉड मार्केट का हाल: स्मॉलकैप में लचीलापन
दिलचस्प बात यह है कि बड़े इंडेक्स गिरने के बावजूद, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जिससे पता चलता है कि व्यापक बाजार में चुनिंदा खरीदारी अभी भी जारी है।