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वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। 31 जुलाई की समयसीमा, लेट फीस के नियम और समय पर रिटर्न भरने के फायदों के बारे में यहाँ विस्तार से जानें।
वित्त वर्ष 2025-26 (निर्धारण वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय नजदीक आ रहा है। हालांकि तकनीकी रूप से नया निर्धारण वर्ष शुरू हो चुका है, लेकिन करदाताओं को पोर्टल पर फॉर्म सक्रिय होने का इंतजार करना होगा। आमतौर पर यह प्रक्रिया मई के मध्य तक शुरू हो जाती है।
ITR फाइलिंग की शुरुआत: कब सक्रिय होंगे फॉर्म?
निर्धारण वर्ष (AY) 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग की खिड़की आमतौर पर मई महीने में खुलती है। आयकर विभाग जब अपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन यूटिलिटीज को ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव कर देता है, तभी वास्तविक फाइलिंग शुरू हो पाती है। पिछले वर्ष नई कर व्यवस्था और कैपिटल गेन्स के नियमों में बदलाव के कारण इसमें देरी हुई थी, लेकिन इस वर्ष विशेषज्ञों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही फॉर्म जारी कर देगा। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने फॉर्म 16 और AIS (Annual Information Statement) के तैयार होने का इंतजार करें ताकि डेटा का मिलान सटीक हो सके।
AY 2026-27 के लिए महत्वपूर्ण डेडलाइन्स
करदाताओं को जुर्माने से बचने के लिए अपनी श्रेणी के अनुसार निम्नलिखित तारीखों का ध्यान रखना चाहिए:
- वेतनभोगी और व्यक्तिगत श्रेणी (ITR-1, ITR-2): बिना किसी ऑडिट के फाइलिंग की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 है।
- गैर-ऑडिट बिजनेस केस (ITR-3, ITR-4): व्यवसायियों के लिए यह समयसीमा 31 अगस्त, 2026 तक है।
- ऑडिट अनिवार्य मामले: जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट आवश्यक है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।
- ट्रांसफर प्राइसिंग (अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन): विशिष्ट कॉर्पोरेट मामलों के लिए 30 नवंबर, 2026 तक रिटर्न भरा जा सकता है।
देरी से फाइलिंग और सुधार (Belated & Revised Return)
यदि कोई करदाता 31 जुलाई की समयसीमा चूक जाता है, तो वह 31 दिसंबर, 2026 तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ भर सकता है, हालांकि इसके लिए लेट फीस देनी होगी। यदि फाइल किए गए रिटर्न में कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने के लिए ‘संशोधित रिटर्न’ (Revised Return) 31 मार्च, 2027 तक जमा किया जा सकता है। इसके अलावा, पुराने टैक्स मामलों को सुलझाने के लिए ‘अपडेटेड रिटर्न’ की सुविधा निर्धारण वर्ष के अंत से 4 साल बाद तक (31 मार्च, 2031) उपलब्ध रहती है।
समय पर फाइलिंग के लाभ और देरी के नुकसान
समय पर ITR फाइल करना केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके कई वित्तीय लाभ भी हैं। समय पर रिटर्न भरने से टैक्स रिफंड जल्दी प्रोसेस होता है और आप अपने व्यापारिक नुकसान (Losses) को अगले वर्षों के लिए ‘कैरी फॉरवर्ड’ कर सकते हैं। देरी होने पर धारा 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। इसके अतिरिक्त, बैंक से लोन लेते समय या वीजा आवेदन के दौरान पिछले तीन वर्षों के समय पर भरे गए ITR सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में मांगे जाते हैं।