लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का नेतृत्व किया। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) के फेल होने पर विपक्ष के खिलाफ बीजेपी का बड़ा प्रदर्शन।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (21 अप्रैल, 2026) को लखनऊ में ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का नेतृत्व किया। यह विरोध प्रदर्शन लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) के पारित न हो पाने के विरोध में आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा वोट न देने के कारण यह बिल गिर गया था।
राजभवन से विधानसभा तक गूंजा आक्रोश
लखनऊ में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ में… https://t.co/PRaCFx2oGS
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 21, 2026
मुख्यमंत्री आवास से शुरू हुई यह पदयात्रा विधानसभा भवन तक निकाली गई। इस दौरान ‘जन आक्रोश रैली’ में हजारों की संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री— ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य, राज्य सरकार की महिला मंत्री और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं।
पदयात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे रूट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। मुख्यमंत्री ने इस मार्च के जरिए सीधे तौर पर विपक्ष की ‘महिला विरोधी’ मानसिकता पर सवाल उठाए।
विपक्ष पर तीखे हमले: “महिलाओं का हक छीनना चाहती है कांग्रेस-सपा”
पदयात्रा के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक पर जमकर प्रहार किया:
- डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक: उन्होंने कहा, “विपक्ष ने जिस तरह से महिला आरक्षण बिल को रोका है, वह अत्यंत दुखद है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को आने वाले चुनावों में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। देश की महिलाएं इस अपमान को नहीं भूलेंगी।”
- मंत्री आशीष पटेल: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का एक ‘अघोषित एजेंडा’ है कि देश की महिलाओं को उनके अधिकार न मिलें। जब 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ आया था, तब सब साथ थे, लेकिन जब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने का समय आया, तो विपक्ष ने अड़ंगा लगा दिया।
- मेयर सुषमा खर्कवाल: उन्होंने कहा कि सदियों से महिलाएं अपना हक मांग रही थीं। जब प्रधानमंत्री मोदी उन्हें उनका अधिकार दे रहे हैं, तो विपक्ष इसका विरोध कर रहा है।
लोकसभा में क्यों फेल हुआ बिल?
17 अप्रैल, 2026 को संसद के विशेष सत्र के दौरान 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया को संशोधित कर 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना था।
- वोटिंग का गणित: बिल के पक्ष में 298 सदस्यों ने वोट दिया, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े।
- संवैधानिक अड़चन: चूंकि यह एक संविधान संशोधन बिल था, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत (लगभग 360 वोट) की आवश्यकता थी। विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) ने परिसीमन प्रक्रिया के आधार पर आरक्षण का विरोध करते हुए पक्ष में मतदान नहीं किया, जिससे बिल गिर गया।
सरकार ने इसके बाद परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को भी वापस ले लिया, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।