सिविल सेवा दिवस 2026: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों को दी बधाई; ‘विकसित भारत’ के संकल्प को दोहराया

सिविल सेवा दिवस 2026: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों को दी बधाई; 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराया

सिविल सेवा दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने सिविल सेवकों को सराहा। जानें सरदार पटेल के ‘स्टील फ्रेम’ का इतिहास और विकसित भारत का संकल्प।

सिविल सेवा दिवस 2026, राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: लोकतंत्र की संस्थाओं को मजबूत कर रहे हैं सिविल सेवक

नई दिल्ली में हर साल की तरह आज, 21 अप्रैल को देशभर में ‘सिविल सेवा दिवस’ (Civil Services Day) पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह विशेष दिन उन अधिकारियों को समर्पित है जो शासन-प्रशासन की रीढ़ बनकर देश के विकास में निरंतर अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं। इस गौरवशाली अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिविल सेवकों की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी भविष्योन्मुखी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के कारण ही आज करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे भारत नई आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है, अधिकारियों की सत्यनिष्ठा और सहानुभूति राज्य और नागरिकों के बीच अटूट विश्वास को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने सिविल सेवकों से सार्वजनिक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और एक अधिक समतापूर्ण व प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

पीएम मोदी और अमित शाह का विजन: राष्ट्र सेवा ही विकसित भारत की नींव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवा दिवस को ‘सुशासन और राष्ट्र निर्माण’ के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर से लेकर नीति निर्माण तक, सिविल सेवकों के अथक प्रयास अनगिनत जिंदगियों को सकारात्मक रूप से छूते हैं और देश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होते हैं। प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत’ के अपने विजन को साझा करते हुए संकल्प दोहराया कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर एक सशक्त, समृद्ध और संवेदनशील भारत बनाया जाएगा। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने और शासन को मजबूत करने के प्रति उनका समर्पण राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अवसर राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और अधिक दृढ़ करेगा।

सिविल सेवा दिवस का गौरवशाली इतिहास और इसका महत्व

सिविल सेवा दिवस के इतिहास और इसके महत्व की बात करें तो यह दिन सिविल सेवकों के लिए खुद को नागरिकों के प्रति समर्पित करने और सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्टता के अपने संकल्प को नवीनीकृत करने का एक मंच है। 21 अप्रैल की तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसी दिन 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को ऐतिहासिक संबोधन दिया था। सरदार पटेल ने ही सिविल सेवकों को ‘भारत का स्टील फ्रेम’ (Steel Frame of India) की संज्ञा दी थी, जो आज भी प्रशासनिक ढांचे की मजबूती का प्रतीक है। आधिकारिक तौर पर पहला सिविल सेवा दिवस समारोह 21 अप्रैल, 2006 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था। आज के इस विशेष दिन पर बेहतर प्रशासन और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न अधिकारियों और विभागों को ‘प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जाता है।

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