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थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने जागरूकता रैली और 25 वर्षों की सेवा पूरी करने वाली नर्सों के सम्मान समारोह के साथ ‘विश्व नर्स दिवस 2026’ मनाया।
स्वास्थ्य सेवा के स्तंभों का सम्मान: थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मनाया गया ‘विश्व नर्स दिवस’
मंगलवार, 12 मई 2026 को थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (TGMCH) में विश्व नर्स दिवस के अवसर पर ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल’ की जयंती को बेहद उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में डॉक्टरों, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों, अनुभवी नर्सों और प्रशिक्षु नर्सिंग छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सेवा में नर्सों के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करना और समाज में इस पेशे के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना था।
नर्सिंग जागरूकता रैली का भव्य आयोजन
उत्सव के एक हिस्से के रूप में, एक भव्य **नर्सिंग जागरूकता रैली** का आयोजन किया गया। इस रैली को अस्पताल परिसर से वरिष्ठ अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली अस्पताल से शुरू होकर **वी.ओ.सी. कॉलेज (V.O.C. College)** तक गई। रैली में शामिल नर्सों और छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर स्वास्थ्य सेवा की गरिमा और नर्सिंग के महत्व के बारे में संदेश दिए। सफेद वर्दी में सैकड़ों स्वास्थ्य योद्धाओं की इस पदयात्रा ने आम जनता का ध्यान खींचा और यह संदेश दिया कि एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के पीछे नर्सों का मानवीय स्पर्श और समर्पण सबसे बड़ी ताकत है।
डॉक्टरों और प्रशासन ने जताया आभार
अस्पताल के डीन और वरिष्ठ डॉक्टरों ने नर्सिंग बिरादरी को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नर्सों का योगदान किसी भी पैमाने से **’अथाह’** है। अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया कि जहां डॉक्टर बीमारी का निदान और उपचार तय करते हैं, वहीं नर्सें वह कड़ी हैं जो 24 घंटे मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का प्रयास करती हैं। डीन ने जोर देकर कहा कि नर्सिंग स्टाफ के बिना किसी भी सरकारी मेडिकल संस्थान का सुचारू रूप से चलना असंभव है, क्योंकि वे ही मरीजों और उनके परिवारों के बीच प्राथमिक संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करती हैं।
चुनौतियों के बावजूद अटूट समर्पण
इस अवसर पर नर्सिंग सुपरीटेंडेंट **अमुता रानी** ने नर्सिंग पेशे की वर्तमान चुनौतियों और वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में **नर्सों की कमी** (Shortage of nurses) एक वैश्विक समस्या है, लेकिन इसके बावजूद थूथुकुडी अस्पताल की टीम का मनोबल ऊंचा है। उन्होंने कहा, “भले ही हमारे पास स्टाफ की कमी है, लेकिन हम मरीजों के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं।” अमुता रानी के ये शब्द उन सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स के साहस को दर्शाते हैं जो संसाधनों की कमी के बावजूद दिन-रात सेवा में जुटे रहते हैं।
दिवाली और पोंगल से भी बड़ा ‘नर्स दिवस’
नर्स **उमा माहेश्वरी** ने इस दिन के भावनात्मक महत्व को साझा करते हुए एक दिल छू लेने वाली बात कही। उन्होंने बताया कि नर्सों के लिए यह दिन किसी भी बड़े त्यौहार से बढ़कर क्यों है। उन्होंने कहा, “काम की व्यस्तता और इमरजेंसी ड्यूटी के कारण हम अक्सर **दीपावली और पोंगल** जैसे त्यौहार अपने परिवार के साथ नहीं मना पाते। इसलिए, हम ‘नर्स दिवस’ को ही अपना सबसे बड़ा त्यौहार मानते हैं। यह हमारे लिए अपनी पहचान और अपने पेशे पर गर्व करने का विशेष अवसर है।” इस कार्यक्रम में नर्सिंग स्कूल के छात्रों की भागीदारी ने नई पीढ़ी को सेवा के प्रति प्रेरित करने का काम किया।
25 साल की सेवा का सम्मान
रैली के समापन के बाद, एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें **जिला कलेक्टर** द्वारा उन वरिष्ठ नर्सों को सम्मानित किया गया जिन्होंने **25 साल की निरंतर सेवा** पूरी कर ली है। इन ‘रजत जयंती’ नर्सों का सम्मान न केवल उनकी लंबी सेवा की मान्यता थी, बल्कि युवा प्रशिक्षुओं के लिए एक मिसाल भी थी। जिला प्रशासन द्वारा दिया गया यह सम्मान दर्शाता है कि समाज और सरकार उनके कठिन परिश्रम और त्याग की कद्र करती है।
सेवा और करुणा का संकल्प
थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में विश्व नर्स दिवस का आयोजन इस संकल्प के साथ समाप्त हुआ कि करुणा और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ मरीजों की सेवा जारी रहेगी। चिकित्सा तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन एक नर्स द्वारा दी जाने वाली सहानुभूति, धैर्य और व्यक्तिगत देखभाल का कोई विकल्प नहीं हो सकता। यह उत्सव न केवल एक दिन की औपचारिकता थी, बल्कि उन हजारों नर्सों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम था जो मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर चुकी हैं।