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कलावा या रक्षा सूत्र बांधने के भी खास नियम होते हैं। जानिए पुरुषों और महिलाओं को किस हाथ में कलावा बांधना चाहिए और इसके पीछे का धार्मिक व वैज्ञानिक कारण।
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या अनुष्ठान के समय कलावा (मौली) बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे ‘रक्षा सूत्र’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है रक्षा करने वाला धागा। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि कलावा किस हाथ में बांधना शुभ होता है?
शास्त्रों के अनुसार, कलावा बांधने के विशेष नियम हैं जो पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग होते हैं। यहाँ इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई है:
कलावा किस हाथ में बांधना चाहिए?
शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- पुरुष और अविवाहित कन्याएं: पुरुषों और अविवाहित लड़कियों को हमेशा दाहिने हाथ (Right Hand) में कलावा बांधना चाहिए। दाहिना हाथ शुभ कार्यों और संकल्प के लिए प्रधान माना जाता है।
- विवाहित महिलाएं: विवाहित महिलाओं के लिए बाएं हाथ (Left Hand) में कलावा बांधना शुभ और शास्त्रसम्मत माना गया है।
कलावा बांधते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- मुट्ठी बंद और हाथ सिर पर: कलावा बंधवाते समय व्यक्ति की मुट्ठी बंद होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए। बंद मुट्ठी संकल्प का प्रतीक है।
- लपेटने की संख्या: कलावा हाथ पर केवल 3 बार ही लपेटना चाहिए। ये तीन घेरे ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) के साथ-साथ सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती (त्रिदेवी) के प्रतीक माने जाते हैं।
- कलावा बदलने का दिन: पुराने कलावे को बदलने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
कलावा बांधने का महत्व
धार्मिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया था। माना जाता है कि कलावा बांधने से त्रिदेव और त्रिदेवी की कृपा बनी रहती है और व्यक्ति हर संकट से सुरक्षित रहता है।
वैज्ञानिक महत्व
आयुर्वेद के अनुसार, कलाई पर कलावा बांधने से नसों पर हल्का दबाव बना रहता है, जिससे शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। यह रक्तचाप (Blood Pressure) और हृदय संबंधी रोगों को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है।
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