हरियाणा में ₹5,714.80 करोड़ की जल सुरक्षा योजना, श्याम सिंह राणा ने बताई पूरी रणनीति

हरियाणा में ₹5,714.80 करोड़ की जल सुरक्षा योजना, श्याम सिंह राणा ने बताई पूरी रणनीति

 

हरियाणा में Water Secure Haryana Programme 2026-2032 तक लागू होगा। ₹5,714.80 करोड़ की योजना में विश्व बैंक ₹4,000.36 करोड़ देगा, जबकि राज्य सरकार ₹1,714.44 करोड़ खर्च करेगी।

हरियाणा सरकार राज्य में जल सुरक्षा को मजबूत करने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश में ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ (Water Secure Haryana) कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, भूजल पर दबाव कम करना और किसानों को जल-कुशल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

6 साल में पूरा होगा Water Secure Haryana कार्यक्रम

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के अनुसार, Water Secure Haryana Programme को वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत ₹5,714.80 करोड़ रखी गई है।

परियोजना की कुल लागत का 70 प्रतिशत यानी ₹4,000.36 करोड़ विश्व बैंक से वित्तीय सहायता के रूप में प्राप्त होगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत यानी ₹1,714.44 करोड़ हरियाणा सरकार अपने हिस्से के रूप में वहन करेगी। कार्यक्रम को World Bank के Program-for-Results ढांचे के तहत लागू किया जाना प्रस्तावित है।

जलभराव और खारेपन से प्रभावित जमीन को किया जाएगा दुरुस्त

श्याम सिंह राणा ने बताया कि योजना के तहत जलभराव और लवणीयता से प्रभावित कृषि भूमि को दोबारा उपयोगी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए Sub-Surface Drainage और Vertical Drainage जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार ने लगभग 2 लाख एकड़ जलभराव और लवणता प्रभावित भूमि को सुधारने का लक्ष्य रखा है। इससे ऐसी जमीन को फिर से कृषि योग्य बनाने और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

DSR और फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा

Water Secure Haryana कार्यक्रम में पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि पद्धतियों में बदलाव पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत लगभग 5 लाख एकड़ क्षेत्र में Direct Seeded Rice (DSR) को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत लगभग 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को प्रभावित किए बिना कृषि में पानी की खपत को कम करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।

किसानों की आय बढ़ाने पर भी फोकस

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को कार्यक्रम के तहत तय किए गए वार्षिक लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर ऐसी कृषि तकनीकों और फसल पद्धतियों को बढ़ावा देने पर है, जिनसे पानी की बचत के साथ किसानों की आय में भी सुधार हो सके।

योजना में जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक और जल-कुशल कृषि को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे खेती को बदलते जलवायु और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

15 प्राथमिक सिंचाई क्लस्टरों में होगा काम

Water Secure Haryana Programme को 15 प्राथमिक सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा। ये क्लस्टर लगभग 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया को कवर करेंगे। कार्यक्रम में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, माइक्रो इरिगेशन एवं कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MICADA) और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मिलकर काम करेंगे।

योजना के व्यापक ढांचे में नहरों के पुनर्वास, जल निकायों के निर्माण, माइक्रो-इरिगेशन, भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग जैसे कदम भी शामिल हैं।

जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

कार्यक्रम के तहत नहरों और जल वितरण प्रणाली की निगरानी के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने SCADA और RTDAS जैसी प्रणालियों के जरिए नहरों में पानी के प्रवाह और डिस्चार्ज की रियल-टाइम मॉनिटरिंग का प्रावधान किया है।

इससे पानी के वितरण की निगरानी बेहतर होने, जल लेखांकन में पारदर्शिता बढ़ने और सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

जल सुरक्षा के साथ टिकाऊ खेती की ओर हरियाणा

श्याम सिंह राणा ने कहा कि Water Secure Haryana का लक्ष्य केवल जल संसाधनों का विकास करना नहीं, बल्कि किसानों को ऐसी कृषि व्यवस्था उपलब्ध कराना है जो लंबे समय तक टिकाऊ रहे। भूजल संरक्षण, जलभराव प्रभावित भूमि का सुधार, फसल विविधीकरण और पानी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा देकर हरियाणा को जल सुरक्षा की दिशा में मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है।

सरकार के मुताबिक, इस कार्यक्रम से जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और प्रदेश में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अधिक टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

 

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