Vladimir Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18 दिसंबर 2025 को भारत यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुतिन के लिए निजी डिनर आयोजित करेंगे, और दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग और कच्चे तेल खरीद पर शिखर वार्ता होगी।
इस यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच 23वीं शिखर वार्ता में विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौते किए जा सकते हैं। खासकर रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, और छोटे ‘मॉड्यूलर रिएक्टर’ जैसी तकनीकी साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पश्चिमी देशों की नजर इस वार्ता पर होगी, क्योंकि रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से वैश्विक परिप्रेक्ष्य में कई सवाल उठ रहे हैं।
भारत-रूस व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग
भारत और रूस के बीच एक और महत्वपूर्ण मुद्दा रूस से कच्चे तेल की खरीद का होगा, जिसे लेकर भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है। अमेरिकी दबाव के बावजूद, रूस से कच्चे तेल की खरीद भारतीय सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। शिखर बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है, खासकर अमेरिकी प्रतिबंधों और रूस से कच्चे तेल की खरीद के असर पर।
पुतिन की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी हैदराबाद हाउस में पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए दोपहर का भोज भी आयोजित करेंगे। इसके अलावा, पुतिन सुबह राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
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रूस से कच्चे तेल की खरीद और अमेरिकी प्रतिबंध
भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा शिखर वार्ता में उठ सकता है। भारत की रूस से कच्चे तेल की बढ़ती खरीद के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों का असर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है, जैसा कि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने हाल ही में बताया।
यूक्रेन संकट पर भी चर्चा हो सकती है
शिखर वार्ता में पुतिन के यूक्रेन संकट पर अमेरिकी प्रयासों से भारत को अवगत कराए जाने की संभावना है। भारत लगातार इस बात का समर्थन करता रहा है कि यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है।
भारत-रूस शिखर वार्ता में होने वाले समझौते
व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी के बीच हुई वार्ता के बाद, कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इन समझौतों में भारतीय श्रमिकों के रूस में आवागमन को आसान बनाने के लिए एक समझौता और रक्षा सहयोग के तहत साजो-सामान के सहयोग पर एक अन्य समझौता शामिल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, फार्मा, कृषि, खाद्य उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्रों में भारत से रूस को निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की संभावना है।