मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी पर जोर दिया, बोले – ‘अयोग्यता का मतलब संस्थाओं की विफलता’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी पर जोर दिया, बोले - 'अयोग्यता का मतलब संस्थाओं की विफलता'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि अयोग्यता का मतलब संस्थाओं की विफलता है। उन्होंने 2047 तक भेदभाव-मुक्त भारत बनाने के लिए पंच प्रण पर बल दिया।

उत्तर प्रदेश में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के स्थापना सप्ताह समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज में अगर कोई व्यक्ति अयोग्य है, तो इसका मतलब है कि शिक्षा संस्थाओं ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना चाहिए ताकि देश को योग्य नागरिक मिल सकें।

2047 तक एक भेदभाव-मुक्त भारत का निर्माण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “पंच प्रण” के महत्व को भी रेखांकित किया, जो 2047 तक एक भेदभाव-मुक्त भारत बनाने का दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने इन पंच प्रणों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह भारत को प्रगति की ओर ले जाएंगे। इन पंच प्रणों में राष्ट्र की विरासत पर गर्व करना, गुलामी के अंशों को समाप्त करना, सैनिकों के प्रति सम्मान, सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना और नागरिक कर्तव्यों का पालन करना शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले दुनिया में शीर्ष पर थी, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान यह नष्ट कर दी गई थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खुद को एक नई पहचान दी है और आज वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि हमें यह मानसिकता छोड़नी होगी कि भारत में कुछ कम है और विदेश में ही सब कुछ अच्छा है।

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शिक्षा संस्थाएं – समाज के विकास के स्तंभ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि जब कोई व्यक्ति अयोग्य कहा जाता है, तो यह शिक्षा संस्थाओं की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र का सर्वांगीण विकास संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि यह जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई जाती है, तो अयोग्यता का सवाल ही नहीं उठता।

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, जो आज 50 से अधिक शिक्षण संस्थानों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है, एक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि कैसे शिक्षा से समाज का परिवर्तन संभव है।

उत्कृष्टता के मार्ग में अनुशासन और समर्पण

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेना ही असली जीत है और यह जीवन में खुशी और आत्मविश्वास लाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि असफलता से निराश होने की बजाय उसे एक सीख के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि वह हमें मजबूत और बुद्धिमान बनाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में तकनीकी समझ और मजबूत चरित्र दोनों आवश्यक हैं। अच्छे नागरिक बनने के लिए अनुशासन, साहस और धैर्य अपनाना जरूरी है।

सामाजिक जिम्मेदारी और एकता का प्रतीक

समारोह के दौरान दो विशेष पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया, जिनमें से एक शोध पत्रिका दिग्विजयम है, जो हमारे समाज के प्रति जिम्मेदारी को उजागर करती है। इसके अलावा, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने एक शोभा यात्रा निकाली, जो एकता और जिम्मेदारी का प्रतीक थी।

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