वेदांता लिमिटेड के शेयरों में 7% से अधिक की भारी गिरावट, ब्लॉक डील ने बढ़ाया बाजार का दबाव

वेदांता लिमिटेड के शेयरों में 7% से अधिक की भारी गिरावट, ब्लॉक डील ने बढ़ाया बाजार का दबाव

 

वेदांता लिमिटेड के शेयरों में ब्लॉक डील के चलते 7% से ज्यादा की गिरावट। प्रमोटर ट्विन स्टार होल्डिंग्स द्वारा हिस्सेदारी बेचने की खबर से बाजार में हलचल।

मंगलवार, 23 जून 2026 को शेयर बाजार में वेदांता लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। एक बड़ी ब्लॉक डील की खबर के बाद कंपनी के शेयरों में 7% से अधिक की गिरावट आई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर वेदांता का शेयर पिछले बंद भाव 305.85 रुपये के मुकाबले 7.5% तक गिरकर 282.85 रुपये के स्तर पर आ गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बिकवाली का मुख्य कारण प्रमोटर समूह द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचना है।

ब्लॉक डील ने बढ़ाया बिकवाली का दबाव

यह भारी गिरावट तब आई जब बाजार में लगभग 6.5 करोड़ शेयरों के आदान-प्रदान (block deal) की खबरें सामने आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रमोटर इकाई ‘ट्विन स्टार होल्डिंग्स’ (Twin Star Holdings) द्वारा ब्लॉक ट्रेड के जरिए 6.5 करोड़ शेयर बेचे जाने की संभावना थी। बताया जा रहा है कि यह सौदा 291 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर निष्पादित किया गया, जो सोमवार के बंद भाव से लगभग 4.9% कम था। इस फ्लोर प्राइस के आधार पर, इस पूरी ट्रांजैक्शन की अनुमानित वैल्यू करीब 1,892 करोड़ रुपये आंकी गई है। बाजार को पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि प्रमोटर अपनी होल्डिंग कम कर सकते हैं, जिसका असर आज के कारोबारी सत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

56% से अधिक है प्रमोटर्स की हिस्सेदारी

आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक वेदांता लिमिटेड में ‘ट्विन स्टार होल्डिंग्स’ की 40.02% हिस्सेदारी थी। वहीं, कुल प्रमोटर समूह के पास कंपनी के 56.38% शेयर थे। हालांकि इस ब्लॉक डील में खरीदार और विक्रेता की आधिकारिक पहचान तुरंत सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन बाजार में यह चर्चा जोरों पर थी कि इसमें बेचने वाली मुख्य इकाई ट्विन स्टार होल्डिंग्स ही है। वेदांता जैसी बड़ी कंपनी, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, के शेयरों में इतनी बड़ी ब्लॉक डील का असर पूरे मेटल सेक्टर पर महसूस किया गया।

बड़े डिमर्जर के बाद हुआ यह घटनाक्रम

यह ब्लॉक डील ऐसे समय पर हुई है जब वेदांता ने हाल ही में अपनी एक ऐतिहासिक ‘डिमर्जर’ (demerger) प्रक्रिया को पूरा किया है। इसी महीने की शुरुआत में, कंपनी ने अपने एल्युमीनियम, तेल और गैस, पावर, तथा आयरन और स्टील व्यवसायों के डिमर्जर के बाद उनकी लिस्टिंग पूरी की थी। यह भारत के कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े पुनर्गठन (restructuring) प्रयासों में से एक माना जा रहा है। डिमर्जर का मुख्य उद्देश्य विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में स्वतंत्र पहचान देना था ताकि शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएट की जा सके।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

वेदांता के शेयरों में आई इस गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो डिमर्जर के बाद कंपनी की संरचना में बदलाव हुआ है, जिससे भविष्य में विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। लेकिन, प्रमोटर द्वारा हिस्सेदारी बेचना अक्सर अल्पावधि में बाजार में नकारात्मक संदेश देता है।

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटर्स द्वारा धन जुटाने के लिए हिस्सेदारी बेचना एक सामान्य कॉर्पोरेट रणनीति हो सकती है, लेकिन वेदांता के मामले में, पिछले कुछ हफ्तों में हुई कॉर्पोरेट हलचल (डिमर्जर और लिस्टिंग) के बीच यह ब्लॉक डील निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी है। जिन निवेशकों ने हाल ही में कंपनी के विभिन्न व्यवसायों की लिस्टिंग को लेकर निवेश किया था, उनके लिए आज का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा।

आगे आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या शेयर इस गिरावट के बाद रिकवरी दिखाता है या प्रमोटर्स की और भी बिकवाली का दबाव बना रहता है। फिलहाल, वेदांता के शेयरधारक कंपनी की अगली वित्तीय घोषणाओं और बाजार के सेंटीमेंट पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

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