भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट! सेंसेक्स और निफ्टी में 0.6% से ज्यादा की कमजोरी। टेक शेयरों में बिकवाली और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बाजार का हाल जानें।
मंगलवार, 23 जून 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। सुबह बाजार की शुरुआत सपाट से लेकर मामूली बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन देखते ही देखते बाजार में जोरदार बिकवाली का दबाव बन गया। कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में 530 अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 506.38 अंक (0.66%) गिरकर 76,587.69 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 162 अंकों (0.67%) की गिरावट आई और यह 23,940.90 पर आ गया।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
1. वैश्विक स्तर पर टेक शेयरों में भारी बिकवाली:
बाजार में आई इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण दुनिया भर के बाजारों में तकनीक (Tech) शेयरों में हुई मुनाफावसूली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नाम पर इस साल शेयर बाजार में जो अभूतपूर्व तेजी आई थी, अब उस पर सवाल उठने लगे हैं। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स एक दिन में 9% से अधिक गिर गया, जो मार्च 2026 के बाद से इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों का मूड बिगाड़ दिया। एसएंडपी 500 और नैस्डैक 100 के फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे भारतीय बाजार पर भी दबाव बढ़ा।
2. भारतीय आईटी शेयरों में जबरदस्त गिरावट:
वैश्विक संकेतों का सीधा असर भारतीय आईटी दिग्गजों पर दिखा। इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस (TCS) और एचसीएल टेक (HCLTech) के शेयरों में 3% तक की गिरावट देखी गई। इंफोसिस इस गिरावट में सबसे आगे रही, जिसके शेयरों में 2.44% की कमजोरी देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.64% गिरकर 27,174.45 पर आ गया। चूंकि हाल के दिनों में आईटी शेयरों ने बाजार की तेजी में बड़ी भूमिका निभाई थी, इसलिए अब इनमें हो रही बिकवाली का असर पूरे निफ्टी पर साफ दिख रहा है।
3. अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर अनिश्चितता:
बाजार में व्याप्त अस्थिरता के पीछे भू-राजनीतिक (geopolitical) कारण भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान, अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते का सम्मान नहीं करता है, तो वाशिंगटन कड़ा रुख अपनाएगा। हालांकि ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच एक अंतरिम शांति समझौता (interim peace deal) हुआ है, जिसका उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को खत्म करना है, लेकिन इस समझौते की स्थिरता को लेकर निवेशकों में अभी भी संशय बना हुआ है। किसी भी क्षण तनाव बढ़ने की आशंका बाजार में घबराहट पैदा कर रही है।
बाजार का भविष्य: सतर्कता की जरूरत
बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशक फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। एआई बूम के बाद अब बड़ी कंपनियों के वास्तविक मुनाफे और उनके भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (Capex) पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में भारतीय बाजार में भी सेक्टर रोटेशन देखने को मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखें।
मंगलवार की यह गिरावट केवल एक तकनीकी सुधार (technical correction) है या किसी बड़ी गिरावट की शुरुआत, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को देखते हुए पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने और घबराहट में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचने की जरूरत है।